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सुलतानपुर जेल में सुरक्षा की खुली पोल: पत्नी की हत्या के आरोपी ने बैरक में की खुदकुशी, अनाथ हुए मासूम

 

सुलतानपुर। जिला कारागार सुलतानपुर में सोमवार की रात सुरक्षा व्यवस्था को ठेंगा दिखाते हुए पत्नी की हत्या के आरोपी एक बंदी ने संदिग्ध परिस्थितियों में आत्महत्या कर ली। धनपतगंज के चरथई निवासी नक्छेद (45) का शव सोमवार रात करीब डेढ़ बजे जेल के बैरक के अंदर शौचालय में प्लास्टिक की रस्सी से लटका मिला। इस घटना ने न केवल जेल प्रशासन की सतर्कता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि एक हंसते-खेलते परिवार के उजड़ने की दुखद दास्तां को भी मुकम्मल कर दिया है।

मामूली बात पर उजाड़ा था अपना घर

बंदी नक्छेद को अपनी पत्नी कुसुम (42) की जघन्य हत्या के आरोप में 25 मार्च को जेल भेजा गया था। घटना 24 मार्च की है, जब गांव में लिंटर डालने का काम कर रहे नक्छेद ने पत्नी को फोन किया था। कुसुम के फोन न उठा पाने से नाराज नक्छेद ने रात 12 बजे घर लौटकर डंडे से उसे बेरहमी से पीटना शुरू कर दिया।

हृदयविदारक बात यह रही कि उसके दो छोटे बच्चे, उदयभान (9 वर्ष) और दीक्षा (8 वर्ष), अपनी माँ को बचाने के लिए पिता के आगे गिड़गिड़ाते रहे, लेकिन नक्छेद ने उन्हें धक्का देकर हटा दिया और बच्चों के सामने ही अपनी पत्नी की जान ले ली। गिरफ्तारी के बाद आरोपी ने खुद को ‘भोले बाबा का भक्त’ बताते हुए दावा किया था कि उसने अधिक मात्रा में भांग का सेवन किया था, जिससे उसका मानसिक संतुलन बिगड़ गया था।

जेल प्रशासन पर सुलगते सवाल: सुरक्षा में सेंध या बड़ी लापरवाही?

जेल कमांडेंट प्रांजल अरविंद ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि शव प्लास्टिक की रस्सी से लटका पाया गया। लेकिन इस बयान ने जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर कई तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं:

रस्सी कहाँ से आई?: हाई-सिक्योरिटी बैरक के भीतर एक बंदी के पास प्लास्टिक की रस्सी पहुँचना जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़ा प्रश्नचिह्न है। क्या जेल के अंदर सामानों की सघन तलाशी नहीं ली जाती?

निगरानी में चूक: रात के डेढ़ बजे जब बंदी शौचालय में मौत का फंदा लगा रहा था, तब ड्यूटी पर तैनात बंदी रक्षक और सुरक्षाकर्मी कहाँ थे? क्या बैरकों में नियमित गश्त सिर्फ कागजों तक सीमित है?

संवेदनशील बंदियों की अनदेखी: जब बंदी पहले ही अपने मानसिक संतुलन खराब होने की बात कबूल कर चुका था, तो उसे विशेष निगरानी में क्यों नहीं रखा गया?

पीछे छूट गए अनाथ और बेसहारा बच्चे

नक्छेद की इस आत्मघाती कदम के बाद उसके तीन बच्चों के सिर से माता-पिता दोनों का साया उठ गया है। बड़ा बेटा तिलक राज (22) बाहर रहता है, लेकिन घर पर मौजूद दो मासूम बच्चे अब पूरी तरह अनाथ हो चुके हैं। उनके सामने अब जीवन-यापन का गंभीर संकट खड़ा हो गया है, क्योंकि परिवार में उनकी देखभाल करने वाला अब कोई नहीं बचा है।

यह घटना स्पष्ट करती है कि सुलतानपुर जिला जेल के भीतर निगरानी तंत्र पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है। जहाँ एक ओर प्रशासन ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर पल्ला झाड़ लिया है, वहीं स्थानीय लोग जेल के भीतर सुरक्षा में हुई इस भारी चूक के लिए जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं।

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