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कर्नाटक से आई रामलला की 5 क्विंटल वजनी रत्नजड़ित प्रतिमा, चमक देख चौंधिया जाएंगी आंखें; जानें क्या है इसकी खासियत”।

अयोध्या के राम मंदिर में रामलला की दूसरी वर्षगांठ (जनवरी 2026) से ठीक पहले कर्नाटक से एक बेहद भव्य और रत्न जड़ित प्रतिमा पहुंची है। यह प्रतिमा अपनी चमक और नक्काशी की वजह से चर्चा का विषय बनी हुई है।

प्रतिमा की विशेषताएं और भव्यता

वजन और आकार: इस दिव्य प्रतिमा का वजन लगभग 5 क्विंटल (500 किलोग्राम) है। इसकी ऊंचाई 10 फीट और चौड़ाई 8 फीट है।

कलाकृति: यह दक्षिण भारतीय (कर्नाटक) शिल्प कला का एक अद्भुत नमूना है। इसमें भगवान राम को बेहद मनमोहक रूप में दर्शाया गया है।

रत्न और आभूषण: प्रतिमा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह सोने, चांदी, हीरे और बहुमूल्य रत्नों से जड़ी हुई है। इसकी अनुमानित कीमत करीब 30 करोड़ रुपये बताई जा रही है।

कारीगरी: इसे तंजावुर के कुशल और अनुभवी कारीगरों ने तैयार किया है।

कहां से और किसने भेजी?

प्रेरणा: यह प्रतिमा पेजावर मठ के स्वामी विश्व प्रसन्ना तीर्थ (जो राम मंदिर ट्रस्ट के ट्रस्टी भी हैं) की प्रेरणा से उनके शिष्यों और कर्नाटक के कुछ श्रद्धालुओं द्वारा संयुक्त रूप से भेंट की गई है।

यात्रा: इसे कर्नाटक से अयोध्या तक एक विशेष वैन के जरिए लाया गया। लगभग 1,750 किलोमीटर की यह यात्रा 5 से 6 दिनों में पूरी हुई।

स्थापना की योजना

स्थान: राम मंदिर ट्रस्ट के अनुसार, इस प्रतिमा को मंदिर परिसर में अंगद टीला (गोस्वामी तुलसीदास मंदिर के पास) पर स्थापित करने पर विचार किया जा रहा है।

प्रक्रिया: प्रतिमा के वजन और अन्य विवरणों की अभी आधिकारिक जांच की जा रही है। स्थापना से पहले एक भव्य अनावरण कार्यक्रम और विशेष अनुष्ठान (प्राण प्रतिष्ठा) आयोजित किया जाएगा, जिसमें देशभर के संत-महंत शामिल होंगे।

विशेष नोट: यह प्रतिमा किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे कर्नाटक राज्य की ओर से श्रद्धा स्वरूप भेंट मानी जा रही है। डाक विभाग के माध्यम से इसके आने की सूचना ट्रस्ट को मिली थी।

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