रिश्तों पर जमी बर्फ पिघलाने की कोशिश? खालिदा जिया के जनाजे में शामिल होने बांग्लादेश जाएंगे जयशंकर।

रिश्तों में तनातनी के बीच ढाका जाएंगे जयशंकर: बेगम खालिदा जिया के अंतिम संस्कार में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे
नई दिल्ली/ढाका, 30 दिसंबर 2025: बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की अध्यक्ष बेगम खालिदा जिया के निधन के बाद भारत ने एक बड़ा कूटनीतिक कदम उठाया है। भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर कल यानी 31 दिसंबर 2025 को ढाका की यात्रा करेंगे, जहाँ वे भारत सरकार और देश की जनता की ओर से खालिदा जिया के अंतिम संस्कार में शामिल होंगे।
खालिदा जिया का मंगलवार सुबह 80 वर्ष की आयु में ढाका के एवरकेयर अस्पताल में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह दौरा?
अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद से भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में काफी ठंडापन देखा जा रहा है। ऐसे संवेदनशील समय में विदेश मंत्री का वहां जाना कई मायनों में अहम है:
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कूटनीतिक संतुलन: बांग्लादेश में फरवरी 2026 में चुनाव होने वाले हैं, जहाँ BNP को एक मजबूत दावेदार के रूप में देखा जा रहा है। ऐसे में खालिदा जिया को सम्मान देना भविष्य के रिश्तों के लिए एक पुल का काम कर सकता है।
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शांति का संदेश: भारत इस दौरे के जरिए यह संदेश देना चाहता है कि वह बांग्लादेश के साथ अपने पड़ोसी धर्म को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है, चाहे सत्ता में कोई भी हो।
अंतिम संस्कार की रूपरेखा
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समय: खालिदा जिया का अंतिम संस्कार बुधवार को ‘जुहर’ की नमाज के बाद ढाका के नेशनल पार्लियामेंट प्लाजा (दक्षिण प्लाजा) में आयोजित किया जाएगा।
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विश्राम स्थल: उन्हें ढाका के जिया उद्यान में उनके पति और पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान की कब्र के पास राजकीय सम्मान के साथ सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।
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शोक: बांग्लादेश सरकार ने इस दुखद घड़ी में तीन दिवसीय राजकीय शोक की घोषणा की है।
पीएम मोदी ने जताया शोक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए कहा:
“पूर्व प्रधानमंत्री बेगम खालिदा जिया के निधन की खबर सुनकर गहरा दुख हुआ। बांग्लादेश के विकास और भारत-बांग्लादेश संबंधों में उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा। मुझे 2015 में ढाका में उनसे हुई अपनी मुलाकात की याद है।”
खालिदा जिया: एक युग का अंत
खालिदा जिया का जन्म 1946 में अविभाजित भारत के जलपाईगुड़ी (पश्चिम बंगाल) में हुआ था। वह तीन बार बांग्लादेश की प्रधानमंत्री रहीं। अपने चार दशक लंबे राजनीतिक जीवन में उन्होंने सैन्य शासन के खिलाफ संघर्ष से लेकर भ्रष्टाचार के आरोपों में जेल जाने तक का लंबा सफर तय किया। उनके निधन को बांग्लादेश की राजनीति में एक बड़े युग का अंत माना जा रहा है।




