“थकी हूं, डरी हूं और विश्वास खो रही हूं…”: सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर कुलदीप सेंगर की बेटी का छलका दर्द।

उन्नाव रेप मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा कुलदीप सिंह सेंगर की जमानत पर रोक लगाए जाने के बाद, अब इस मामले में एक नया मोड़ सामने आया है। जहां एक ओर पीड़िता ने कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है, वहीं दूसरी ओर कुलदीप सेंगर की छोटी बेटी ऐश्वर्या सेंगर का एक बेहद भावुक सोशल मीडिया पोस्ट वायरल हो रहा है।
यहाँ इस पूरे घटनाक्रम पर आधारित विस्तृत रिपोर्ट दी गई है:
‘थकी हूं, डरी हूं…’: पिता की जमानत रुकने पर कुलदीप सेंगर की बेटी का छलका दर्द
नई दिल्ली/लखनऊ: सुप्रीम कोर्ट द्वारा उन्नाव रेप कांड के मुख्य दोषी कुलदीप सिंह सेंगर की अंतरिम जमानत पर रोक लगाने के फैसले के बाद सोशल मीडिया पर एक नई बहस छिड़ गई है। सेंगर की छोटी बेटी ऐश्वर्या सेंगर ने एक इमोशनल पोस्ट साझा कर अपनी मानसिक स्थिति और परिवार के संघर्ष को बयां किया है।
“एक बेटी की पुकार” – पोस्ट के मुख्य अंश
ऐश्वर्या ने अपने पोस्ट में लिखा कि वह पिछले कई सालों से कानूनी लड़ाई और समाज के तानों से जूझ रही हैं। उनके पोस्ट की मुख्य बातें इस प्रकार हैं:
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थकान और डर: ऐश्वर्या ने लिखा, “मैं अब थक चुकी हूं और डरी हुई हूं। पिछले कई सालों से हम न्याय की उम्मीद में एक दरवाजे से दूसरे दरवाजे भटक रहे हैं।”
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परिवार की स्थिति: उन्होंने बताया कि उनके पिता की अनुपस्थिति में परिवार ने बहुत कुछ झेला है और उन्हें उम्मीद थी कि कोर्ट से कुछ राहत मिलेगी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने उन्हें फिर से गहरे दुख में डाल दिया है।
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समाज से सवाल: उन्होंने अपने पोस्ट के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की कि एक बेटी के रूप में वह केवल अपने पिता का साथ चाहती हैं और इस कानूनी प्रक्रिया में उनका पूरा परिवार बिखर चुका है।
सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख
यह पोस्ट तब आया है जब सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले को पलट दिया जिसमें सेंगर को अपनी बेटी की शादी या अन्य पारिवारिक कारणों से अंतरिम जमानत दी गई थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अपराध की गंभीरता को देखते हुए दोषी को बाहर रहने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
दो पक्षों के बीच बंटा सोशल मीडिया
ऐश्वर्या सेंगर के इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर लोग दो गुटों में बंट गए हैं:
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सहानुभूति रखने वाले: कुछ लोगों का मानना है कि अपराधी की सजा का खामियाजा उसके बच्चों को मानसिक प्रताड़ना के रूप में नहीं भुगतना चाहिए।
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पीड़िता के समर्थक: वहीं, एक बड़ा वर्ग पीड़िता के पक्ष में खड़ा है, जिनका कहना है कि जिस बेटी (पीड़िता) ने अपना पूरा परिवार खो दिया, उसका दर्द सेंगर की बेटी के दर्द से कहीं अधिक बड़ा है।
पीड़िता का जवाब
वहीं दूसरी ओर, पीड़िता ने पहले ही साफ कर दिया है कि सेंगर का बाहर आना उसके और उसके गवाहों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। पीड़िता ने कहा था, “मुझे डर लगता है कि अगर वह बाहर आया तो हमें मार दिया जाएगा।”
निष्कर्ष:
यह मामला अब केवल एक कानूनी लड़ाई नहीं रह गया है, बल्कि दो परिवारों के बीच के संघर्ष और ‘न्याय बनाम मानवीय संवेदनाओं’ की एक जटिल कहानी बन चुका है। जहां एक बेटी अपने पिता की रिहाई के लिए गुहार लगा रही है, वहीं दूसरी बेटी अपने साथ हुए अन्याय के लिए अपराधी को फांसी के फंदे तक पहुँचाना चाहती है।




