गंगोत्री की धारा और मानसरोवर का नीर; अनूठे संगम से होगा बाबा भोलेनाथ का दिव्य जलाभिषेक।

उत्तराखंड के देवप्रयाग और आसपास के क्षेत्रों में धार्मिक आस्था का एक अद्भुत संगम होने जा रहा है। विश्व के सबसे ऊंचे शिवलिंग के अभिषेक को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं, जिसे लेकर श्रद्धालुओं में भारी उत्साह है।
विश्व के सबसे ऊंचे शिवलिंग का होगा ऐतिहासिक अभिषेक; गंगोत्री और मानसरोवर के जल से होगा देवों के देव का तर्पण
देवप्रयाग/रुद्रप्रयाग: उत्तराखंड की पावन धरा पर एक बार फिर भक्ति का अनूठा दृश्य देखने को मिलेगा। विश्व के सबसे ऊंचे शिवलिंग के रूप में प्रतिष्ठित महादेव का अभिषेक इस बार अत्यंत विशिष्ट और भव्य तरीके से किया जाएगा। इस अनुष्ठान के लिए न केवल पवित्र नदियों का जल लाया गया है, बल्कि आसमान से फूलों की वर्षा और भारी मात्रा में विशेष प्रसाद की तैयारियां भी पूरी कर ली गई हैं।
पवित्र जल से जलाभिषेक
इस विशेष पूजन के लिए गंगोत्री धाम और तिब्बत स्थित मानसरोवर झील से पवित्र जल मंगवाया गया है। मान्यता है कि इन दोनों स्थानों के जल का मिश्रण आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक है। विद्वान पंडितों के मंत्रोच्चार के बीच इस जल से भगवान शिव का महा-अभिषेक संपन्न होगा।
पुष्प वर्षा और भव्य आयोजन
आसमान से बरसेगा आशीर्वाद: मंदिर समिति और आयोजकों ने बताया कि मुख्य पूजा के दौरान हेलिकॉप्टर के माध्यम से मंदिर परिसर और शिवलिंग पर कई क्विंटल ताजे फूलों की बारिश की जाएगी।
प्रसाद की तैयारी: महाशिवरात्रि और इस विशेष उत्सव के अवसर पर दो क्विंटल से अधिक बताशे का प्रसाद तैयार किया जा रहा है। इसके साथ ही पंचामृत और स्थानीय फल भी भक्तों में वितरित किए जाएंगे।
सुरक्षा और व्यवस्था
हजारों की संख्या में उमड़ने वाले श्रद्धालुओं को देखते हुए प्रशासन ने कड़े इंतजाम किए हैं।
मंदिर जाने वाले रास्तों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।
हेलिकॉप्टर की लैंडिंग और उड़ान के लिए विशेष क्लीयरेंस ली गई है।
भक्तों के लिए जगह-जगह भंडारे और विश्राम की व्यवस्था की गई है।




