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सेक्स स्कैंडल और अश्लील वीडियो के घेरे में आनंदपुर धाम; क्या भक्ति की आड़ में चल रहा है अधर्म का खेल?

मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले में स्थित श्री आनंदपुर धाम इन दिनों विवादों के केंद्र में है। आध्यात्मिक शांति और सेवा का केंद्र माना जाने वाला यह आश्रम अब यौन शोषण (Sex Scandal), अवैध जमीनी कब्जे और समानांतर शासन चलाने के गंभीर आरोपों का सामना कर रहा है।

 

सेक्स स्कैंडल के आरोपों से मचा हड़कंप

हाल ही में अशोकनगर के ईसागढ़ क्षेत्र में स्थित इस ट्रस्ट पर एक बड़ा धमाका तब हुआ जब कुछ अश्लील वीडियो सार्वजनिक हुए।

आरोप: कांग्रेस नेताओं और स्थानीय लोगों ने दावा किया है कि आश्रम के भीतर महिलाओं का यौन उत्पीड़न किया जा रहा है और कथित ‘अश्लील क्लिप्स’ इसी सच्चाई का हिस्सा हैं।

प्रबंधन का पक्ष: आनंदपुर धाम ट्रस्ट ने इन आरोपों पर फिलहाल चुप्पी साध रखी है। हालांकि, आश्रम के अंदर बाहरी लोगों का प्रवेश वर्जित है और सुरक्षा बेहद कड़ी रहती है।

 

10,000 बीघा जमीन और ‘जबरिया कब्जे’ का विवाद

आनंदपुर धाम के पास हजारों बीघा (अनुमानित 10,000 बीघा से अधिक) जमीन है। यह जमीन विवाद का सबसे बड़ा कारण बनी हुई है—-

 

आदिवासियों की जमीन: ‘द मूकनायक’ और अन्य स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सहारिया आदिवासी परिवारों ने आरोप लगाया है कि ट्रस्ट के ‘महात्माओं’ ने उनकी पुश्तैनी जमीनों पर कब्जा कर लिया है।

धमकी और मारपीट: पीड़ितों का कहना है कि विरोध करने पर उन्हें मारपीट और जान से मारने की धमकियां दी जाती हैं।

 

प्रशासनिक हस्तक्षेप: हाल ही में अशोकनगर के तत्कालीन कलेक्टर आदित्य सिंह और एसपी ने इन विवादों को सुलझाने के लिए दौरा किया था।

 

आश्रम के भीतर अपनी ‘पंचायत’ और ‘समानांतर सरकार’

आनंदपुर धाम की दुनिया बाहरी दुनिया से बिल्कुल अलग है। यहाँ का प्रबंधन किसी सरकारी तंत्र की तरह काम करता है—–

स्वयं का ढांचा: आश्रम परिसर के भीतर अपने स्कूल, अत्याधुनिक अस्पताल और गौशालाएं हैं।

सख्त सुरक्षा: हजारों सीसीटीवी कैमरों और ऊँची दीवारों से घिरा यह परिसर किसी किले जैसा है। यहाँ बिना अनुमति के परिंदा भी पर नहीं मार सकता।

विवादित कार्यप्रणाली: स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि यहाँ उनकी अपनी ‘पंचायत’ चलती है और वे स्थानीय सरकारी कानूनों को दरकिनार कर अपने नियम थोपते हैं।

 

कलेक्टर का अचानक तबादला: क्या कोई राजनीतिक दबाव है?

इस पूरे मामले में एक नया मोड़ तब आया जब अशोकनगर कलेक्टर आदित्य सिंह का अचानक तबादला कर दिया गया।

चर्चा है कि कलेक्टर ने ट्रस्ट के खिलाफ जमीनी शिकायतों पर कड़ी कार्रवाई शुरू की थी, जिससे नाराज होकर ट्रस्ट के प्रभाव के कारण उनका तबादला करा दिया गया।

आदिवासियों के हक में आवाज उठाने वाले प्रशासनिक अधिकारियों के जाने से अब स्थानीय लोगों में डर का माहौल है।

आनंदपुर धाम जो कभी भक्ति का मार्ग माना जाता था, आज वह सीलिंग कानून के उल्लंघन, अवैध कब्जे और नैतिकता के पतन के आरोपों से घिरा है। मामला अब राजनीतिक रूप ले चुका है और स्थानीय प्रशासन पर भारी दबाव है कि वह ‘आध्यात्मिक रसूख’ और ‘न्याय’ के बीच का संतुलन कैसे बनाता है।

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