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शंकराचार्य की पालकी रोके जाने और शिष्यों से मारपीट को लेकर सपाई खफा

सुल्तानपुर

प्रयागराज में चल रहे माघ मेला के दौरान ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की पालकी शोभा यात्रा को प्रशासन द्वारा रोके जाने और उनके शिष्यों के साथ कथित मारपीट की घटना ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। समाजवादी पार्टी ने इस घटना को सनातन धर्म और संत समाज का अपमान बताते हुए उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार और प्रशासन की कड़ी आलोचना की है।

समाजवादी अधिवक्ता सभा के प्रदेश सचिव और बार एसोसिएशन के वरिष्ठ कार्यकारिणी सदस्य अशोक सिंह बिसेन ने बयान जारी कर कहा कि सनातन धर्म ध्वज जगतगुरू स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के अनुयाई शिष्यों पर अभद्र शब्दों, वाक्यों और मारपीट से सर्व संत समाज का अपमान किया गया है।

समाजवादी पार्टी इस अमानवीय कृत्य की घोर निंदा करती है। प्रशासन की आड़ में साधु-संतों का उत्पीड़न कर हिंदू धर्म को शर्मसार करने का प्रयास बंद किया जाए। उन्होंने आगे कहा कि सरकार और प्रशासन शंकराचार्य महाराज पर सवाल खड़ा करना बंद करें और संविधान तथा लोकतांत्रिक मूल्यों को धर्म-पंथ से जोड़कर अपनी नाकामी छुपाने की कोशिश न करें।

पार्टी के वरिष्ठ नेता बिसेन ने अपने बयान में कहा, हिंदुओं की आस्था के प्रतीक और धर्म गुरुओं पर अत्याचार एवं उत्पीड़न की समाजवादी पार्टी घोर निंदा करती है। प्रशासन के ऐसे कृत्य सनातन धर्म, ध्वज, राष्ट्र गौरव और गुरु परंपरा के साथ 100 करोड़ सनातनियों का अपमान हैं।

उन्होंने सवाल उठाया कि यदि प्रशासन शंकराचार्य की पदवी पर संदेह करता है, तो 2025 के महाकुंभ की स्मारिका में उनकी फोटो के साथ ‘शंकराचार्य’ लिखकर मेला प्राधिकरण द्वारा प्रचार क्यों किया गया? प्रशासन और भाजपा सरकार स्पष्ट करें कि पहले महाकुंभ में उन्हें स्थान देकर प्रचारित-प्रसारित कैसे किया गया, और अब नोटिस जारी कर शंकराचार्य लिखने पर आपत्ति क्यों जता रही है?

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