सुल्तानपुर में सियासी पारा हाई: ‘शंकराचार्य का अपमान’ बना मुद्दा, कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने पोस्टर के जरिए खोला मोर्चा”

सुल्तानपुर में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के कथित अपमान को लेकर सियासत गरमा गई है। प्रयागराज माघ मेले के दौरान हुई घटना के विरोध में अब सुल्तानपुर की सड़कों पर ‘पोस्टर वार’ छिड़ गया है।
सुल्तानपुर में पोस्टर वार: ‘शंकराचार्य का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान’ के नारों से गूँजा शहर
सुल्तानपुर (उत्तर प्रदेश): प्रयागराज के माघ मेले में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के साथ हुई कथित अभद्रता और उनके काफिले को रोके जाने का मामला अब पूरे प्रदेश में तूल पकड़ता जा रहा है। इसी कड़ी में सुल्तानपुर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं ने मोर्चा खोल दिया है। शहर के प्रमुख चौराहों पर बड़े-बड़े होर्डिंग्स लगाकर सीधे तौर पर सरकार और प्रशासन को घेरा गया है।
क्या है पूरा मामला?
हाल ही में मौनी अमावस्या के अवसर पर प्रयागराज में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने अनुयायियों के साथ संगम स्नान के लिए जा रहे थे। आरोप है कि मेला प्रशासन और पुलिस ने उन्हें रास्ते में न केवल रोका, बल्कि उनके साथ और उनके शिष्यों के साथ धक्का-मुक्की भी की। इसके बाद शंकराचार्य अनशन पर बैठ गए थे। इस घटना ने धार्मिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।
कांग्रेस नेता ने लगाई होर्डिंग
सुल्तानपुर में कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष सुव्रत सिंह (सनी ) के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने इस घटना का पुरजोर विरोध किया। शहर में लगाई गई होर्डिंग्स पर बड़े अक्षरों में लिखा है:
“जगतगुरु शंकराचार्य का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान”
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि वर्तमान सरकार एक तरफ हिंदुत्व की बात करती है, लेकिन दूसरी तरफ सनातन धर्म के सर्वोच्च धर्मगुरुओं का अपमान कर रही है।
विरोध प्रदर्शन और मांगें
पोस्टर लगाने के साथ ही कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन भी किया। उनकी मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं:
न्यायिक जांच: पूरे घटनाक्रम की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच कराई जाए।
कार्रवाई: जिन अधिकारियों ने शंकराचार्य के साथ अभद्रता की, उन्हें तत्काल निलंबित किया जाए।
माफी की मांग: सरकार और मेला प्रशासन इस कृत्य के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगे।
राजनीतिक गलियारों में हलचल
सुल्तानपुर में शुरू हुए इस पोस्टर वार ने स्थानीय राजनीति को गरमा दिया है। कांग्रेस इसे ‘सनातन धर्म पर हमला’ बताकर भाजपा को बैकफुट पर लाने की कोशिश कर रही है। वहीं, स्थानीय प्रशासन का कहना है कि भीड़ के दबाव और सुरक्षा कारणों से केवल प्रोटोकॉल का पालन किया गया था।


