निर्मला सीतारमण का बड़ा ऐलान: 1 अप्रैल से लागू होगा नया इनकम टैक्स एक्ट; विदेश जाना और पढ़ाई हुई सस्ती!

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज (1 फरवरी, 2026) संसद में केंद्रीय बजट 2026-27 पेश किया। इस बार के बजट में करदाताओं (Taxpayers) के लिए सबसे बड़ी खबर यह है कि सरकार ने इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया है। हालांकि, टैक्स फाइलिंग की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए एक बिल्कुल नया ‘आयकर अधिनियम 2025’ लाने का ऐलान किया गया है।
यहाँ बजट 2026 की मुख्य घोषणाओं और वर्तमान टैक्स स्लैब का पूरा विवरण दिया गया है:
1. नए इनकम टैक्स स्लैब (New Tax Regime)
चूंकि इस साल स्लैब में कोई बदलाव नहीं हुआ है, इसलिए वित्त वर्ष 2025-26 (असेसमेंट ईयर 2026-27) के लिए दरें वही रहेंगी जो पिछले बजट में तय की गई थीं:
| वार्षिक आय (₹) | टैक्स दर (%) |
|—|—|
| ₹0 से ₹4 लाख | 0% (कोई टैक्स नहीं) |
| ₹4 लाख से ₹8 लाख | 5% |
| ₹8 लाख से ₹12 लाख | 10% |
| ₹12 लाख से ₹16 लाख | 15% |
| ₹16 लाख से ₹20 लाख | 20% |
| ₹20 लाख से ₹24 लाख | 25% |
| ₹24 लाख से ऊपर | 30% |
ध्यान दें: नई व्यवस्था के तहत ₹75,000 की स्टैंडर्ड डिडक्शन के बाद, प्रभावी रूप से ₹12.75 लाख तक की वार्षिक आय पर कोई टैक्स नहीं देना होगा (यदि छूट की सीमाओं का सही उपयोग किया जाए)।
2. बजट 2026 की 5 सबसे बड़ी टैक्स घोषणाएं
नया आयकर अधिनियम (New Income Tax Act 2025): 1 अप्रैल 2026 से नया आयकर कानून लागू होगा। इसका उद्देश्य 1961 के पुराने कानून को बदलकर टैक्स नियमों को सरल और पारदर्शी बनाना है।
ITR फाइलिंग की समय सीमा: ITR-1 और ITR-2 (वेतनभोगी वर्ग के लिए) फाइल करने की अंतिम तारीख 31 जुलाई रहेगी। रिवाइज्ड रिटर्न फाइल करने की समय सीमा बढ़ाकर 31 मार्च कर दी गई है।
TCS दरों में कटौती: विदेश में पढ़ाई और इलाज (LRS) के लिए भेजे जाने वाले पैसे पर लगने वाला TCS 5% से घटाकर 2% कर दिया गया है। विदेशी टूर पैकेज पर भी अब सिर्फ 2% TCS लगेगा।
एक्सीडेंट क्लेम पर राहत: मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल (MACT) से मिलने वाले ब्याज पर अब कोई इनकम टैक्स नहीं देना होगा और इस पर TDS भी नहीं कटेगा।
विदेशी संपत्ति का खुलासा: छोटे करदाताओं के लिए अपनी विदेशी संपत्तियों को घोषित करने के लिए 6 महीने की विशेष ‘डिस्क्लोजर स्कीम’ लाई गई है।
3. अन्य महत्वपूर्ण बदलाव
MAT दर: कंपनियों के लिए मिनिमम अल्टरनेट टैक्स (MAT) को 15% से घटाकर 14% कर दिया गया है।
STT में बढ़ोतरी: फ्यूचर्स और ऑप्शंस (F&O) में ट्रेडिंग करने वालों के लिए बुरी खबर है—सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) को बढ़ाकर क्रमशः 0.05% और 0.15% कर दिया गया है।
शेयर बायबैक: अब शेयर बायबैक से होने वाली आय को ‘कैपिटल गेन्स’ माना जाएगा और उसी के अनुसार टैक्स लगेगा।




