प्रशासनिक सुस्ती पर हाईकोर्ट का डंडा: लम्भुआ में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे के खिलाफ ‘एक्शन’ का आदेश

सुलतानपुर/लम्भुआ: उत्तर प्रदेश में भू-माफियाओं और सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे के खिलाफ मुख्यमंत्री की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के बीच, सुलतानपुर जिले के लम्भुआ तहसील से एक बड़ा मामला सामने आया है। यहाँ एक रसूखदार द्वारा हरिजन आबादी के लिए आरक्षित जमीन पर किए गए अवैध कब्जे को हटाने में हो रही देरी पर अब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है।
क्या है पूरा मामला?
मामला लम्भुआ तहसील के ग्राम गरवा (परगना चांदा) का है। यहाँ गाटा संख्या 1527, जो राजस्व अभिलेखों में ‘नवीन परती’ और ‘हरिजन आबादी’ के लिए सुरक्षित है, पर रवींद्र प्रताप सिंह नामक व्यक्ति द्वारा बाउंड्री वॉल बनाकर अवैध कब्जा किया गया था। इस मामले में तहसीलदार लम्भुआ ने 14 मार्च 2023 को ही बेदखली और जुर्माने का आदेश दिया था।
ADM कोर्ट ने खारिज की अपील, कब्जे की हुई पुष्टि
तहसीलदार के आदेश के खिलाफ रवींद्र प्रताप सिंह ने अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) की अदालत में अपील दायर की थी। लेकिन, ADM कोर्ट ने पाया कि राजस्व टीम की पैमाइश और खुद पट्टेदार (शांति देवी) के हलफनामे ने यह साफ कर दिया है कि कब्जा अवैध है। 3 जून 2025 को ADM कोर्ट ने अपीलकर्ता की दलीलों को ‘निराधार’ बताते हुए उसकी अपील खारिज कर दी और तहसीलदार के कठोर आदेश को बहाल रखा।
हाईकोर्ट पहुँचा मामला: प्रशासन को चार हफ्ते का अल्टीमेटम
प्रशासनिक आदेशों के बावजूद जमीन खाली न होने पर, हरेंद्र कुमार भारती ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में रिट याचिका (संख्या 2206/2026) दायर की। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन की प्रक्रियात्मक ढुलमुल कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई।
1) जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस अवधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने आदेश दिया है कि:
याचिकाकर्ता एक सप्ताह के भीतर नियम 460 के तहत SDM लम्भुआ के समक्ष निष्पादन (Execution) के लिए आवेदन करें।
2) SDM लम्भुआ को यह निर्देशित किया गया है कि आवेदन मिलने के 4 सप्ताह के भीतर जमीन से अवैध कब्जा हटाने की प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करें।

इस मामले ने स्थानीय राजस्व अधिकारियों की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। जब 2023 में ही बेदखली का आदेश हो चुका था और 2025 में ADM कोर्ट ने भी मुहर लगा दी थी, तो आखिर प्रशासन किसके दबाव में ‘बुलडोजर’ चलाने से हिचक रहा था? अब हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद लम्भुआ प्रशासन के पास केवल एक महीने का समय है।




