नहर विभाग में ‘मैनेजमेंट’ का खेल: महायतपुर में सरकारी जमीन डकार गए रसूखदार, अफसर मौन।

नहर विभाग की जमीन हड़पने का खेल, मैनेजमेंट की “बू”
जौनपुर ब्रांच से निकली सुल्तानपुर माइनर पर महायतपुर गांव में अतिक्रमण
सुलतानपुर। जनपद के देहात कोतवाली क्षेत्र में नहर विभाग की बेशकीमती सरकारी संपत्ति भू-माफियाओं और रसूखदारों के निशाने पर है। स्थिति यह है कि एक तरफ जमीनें धड़ल्ले से कब्जाई जा रही हैं, तो दूसरी तरफ जिम्मेदार विभाग और स्थानीय पुलिस मूकदर्शक बने हुए हैं। ताजा मामला महायतपुर गांव का है, जहां नहर की भूमि को अवैध रूप से खेत में तब्दील कर दिया गया है।
महायतपुर में ‘खेत’ बन गई नहर की जमीन
जौनपुर ब्रांच से निकली सुल्तानपुर माइनर के किनारे स्थित महायतपुर गांव में अतिक्रमण का बड़ा खेल सामने आया है। स्थानीय सूत्रों और विभागीय जांच के अनुसार:
* बगल के काश्तकारों (किसानों) ने धीरे-धीरे नहर की पटरी और सुरक्षित भूमि को जोतकर अपने खेतों में मिला लिया है।
* आलम यह है कि जहां सरकारी नक्शे में नहर की चौड़ाई अधिक है, वहीं जमीन पर वह सिमट कर बेहद संकरी हो गई है।
* हैरानी की बात यह है कि विभागीय पैमाइश और जांच में अतिक्रमण की पुष्टि भी हो चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
कार्रवाई में ‘मैनेजमेंट’ का रोड़ा?
खबर के अनुसार, विभाग की चुप्पी के पीछे ‘मैनेजमेंट’ (साठगांठ) की चर्चाएं तेज हैं। आरोप है कि विभागीय अधिकारी अतिक्रमणकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई या मुकदमा दर्ज कराने के बजाय मामले को रफा-दफा करने में जुटे हैं। इसी वजह से जांच रिपोर्ट आने के बावजूद फाइल ठंडे बस्ते में डाल दी गई है।
पुराने मामलों में भी पुलिस का सुस्त रवैया
नहर विभाग की संपत्तियों के प्रति लापरवाही का यह कोई पहला मामला नहीं है।
* मुरारपुर गांव में नहर की मिट्टी चोरी के मामले में मुकदमा दर्ज हुए करीब 15 दिन (एक पखवाड़ा) बीत चुके हैं।
* पुलिस के पास नामजद जानकारी होने के बावजूद अब तक आरोपित की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।
इस सुस्त रवैये से स्पष्ट है कि सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा राम भरोसे है। यदि समय रहते इन अवैध कब्जों पर बुलडोजर नहीं चला या दोषियों पर FIR दर्ज नहीं हुई, तो आने वाले समय में नहरों का अस्तित्व ही खतरे में पड़ सकता है।




