जस्टिस सिस्टम को दहलाने की साजिश? 5 राज्यों की जिला अदालतों को मिला ‘RDX’ वाला धमकी भरा ईमेल।

जब भारत के कई राज्यों की जिला अदालतों में ईमेल के जरिए बम की धमकी मिलने से दहशत फैल गई।
देशभर की अदालतों को बम से उड़ाने की धमकी; बिहार, पंजाब और MP-छत्तीसगढ़ में मचा हड़कंप
नई दिल्ली/पटना/रीवा: देश के न्यायिक परिसरों की सुरक्षा में आज उस समय बड़ी सेंध लगाने की कोशिश की गई, जब एक साथ कई राज्यों की जिला अदालतों को ईमेल के जरिए बम से उड़ाने की धमकी दी गई। बिहार, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, पंजाब और हिमाचल प्रदेश की विभिन्न अदालतों में इस धमकी के बाद अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया।
प्रमुख घटनाक्रम: कहाँ-कहाँ मिली धमकी?
बिहार (पटना और दानापुर): पटना सिविल कोर्ट और दानापुर व्यवहार न्यायालय को ईमेल के जरिए 3 RDX IED ब्लास्ट की धमकी मिली। सूचना मिलते ही जिला जज ने तुरंत कोर्ट परिसर खाली करने का आदेश दिया। पुलिस और बम निरोधक दस्ता मौके पर पहुँचकर सघन तलाशी में जुट गया।
मध्य प्रदेश (रीवा): रीवा जिला एवं सत्र न्यायाधीश के आधिकारिक ईमेल पर धमकी भरा संदेश आया, जिसमें दोपहर 2 बजे तक कोर्ट खाली करने का अल्टीमेटम दिया गया था। इसमें भी RDX के इस्तेमाल की बात कही गई थी।
छत्तीसगढ़: राज्य के तीन प्रमुख जिलों—दुर्ग, बिलासपुर और राजनांदगांव—की जिला अदालतों को भी इसी तरह के धमकी भरे ईमेल मिले।
पंजाब: फिरोजपुर, मोगा, मानसा और रूपनगर (रोपर) कोर्ट परिसरों को खाली कराया गया। ईमेल में दावा किया गया था कि रिमोट कंट्रोल के जरिए विस्फोट किया जाएगा।
ईमेल की भाषा और संदिग्ध मकसद
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, ये ईमेल हिंदी और अंग्रेजी में लिखे गए हैं। कुछ संदेशों में तमिलनाडु के 1979 के एक पुराने नेशनल डिफेंस एक्ट का भी जिक्र किया गया है। ईमेल भेजने वाले ने खुद को कानून से ऊपर बताते हुए अदालती कार्यवाही को बाधित करने की चेतावनी दी है।
सुरक्षा एजेंसियों का एक्शन
खाली कराए गए परिसर: एहतियातन सभी प्रभावित कोर्ट परिसरों को खाली करा लिया गया है। वकीलों, कर्मचारियों और फरियादियों को बाहर निकालकर गेट सील कर दिए गए हैं।
तलाशी अभियान: डॉग स्क्वाड और बम डिस्पोजल टीम (BDDS) चप्पे-चप्पे की तलाशी ले रही है। हालांकि, अब तक किसी भी स्थान से कोई संदिग्ध वस्तु बरामद नहीं हुई है।
साइबर सेल की जांच: पुलिस की साइबर सेल ईमेल के आईपी एड्रेस (IP Address) को ट्रैक करने की कोशिश कर रही है। शुरुआती जांच में इसे दहशत फैलाने के लिए किया गया ‘होक्स कॉल’ (Hoax Email) माना जा रहा है, लेकिन संवेदनशीलता को देखते हुए कोई ढील नहीं दी जा रही है।
अदालतों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है और गेट पर स्कैनिंग और चेकिंग सख्त कर दी गई है। वकीलों ने अदालती परिसरों में स्थायी सुरक्षा चौकी और आधुनिक स्कैनर लगाने की मांग की है।



