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जीरो-टैरिफ हनीमून’ खत्म: पाकिस्तानी नेताओं ने जताई आशंका, भारत की मेगा-डील से पाक टेक्सटाइल उद्योग बर्बाद?

भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच हुए ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) ने पाकिस्तान की आर्थिक चिंताएं बढ़ा दी हैं। पाकिस्तानी नेताओं और औद्योगिक विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इस डील के कारण पाकिस्तान के $9 बिलियन (लगभग 750 अरब रुपये) के निर्यात पर खतरा मंडरा रहा है और करीब 1 करोड़ नौकरियां जा सकती हैं।

 

पाकिस्तान के लिए ‘हनीमून पीरियड’ खत्म

पाकिस्तान के पूर्व वाणिज्य मंत्री डॉ. गोहर एजाज ने सोशल मीडिया और मीडिया बयानों के माध्यम से सरकार को आगाह किया है। उन्होंने कहा कि यूरोपीय संघ के साथ पाकिस्तान का ‘जीरो-टैरिफ हनीमून’ अब खत्म हो गया है।

क्या था फायदा? अभी तक पाकिस्तान को EU के GSP Plus स्टेटस के तहत यूरोपीय बाजारों में शुल्क मुक्त (Zero Duty) पहुंच मिलती थी, जबकि भारत को टेक्सटाइल जैसे उत्पादों पर 12% तक टैक्स देना पड़ता था।

अब क्या बदला? भारत-EU डील के बाद अब भारतीय उत्पादों को भी वही ‘जीरो-टैरिफ’ सुविधा मिलेगी। इससे पाकिस्तान का ‘प्राइस एडवांटेज’ पूरी तरह समाप्त हो गया है।

 1 करोड़ नौकरियां और टेक्सटाइल सेक्टर पर संकट

पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार उसका टेक्सटाइल (कपड़ा) उद्योग है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस डील का सबसे घातक असर इसी सेक्टर पर पड़ेगा

निर्यात में गिरावट: पाकिस्तान का लगभग 24% निर्यात यूरोपीय संघ को जाता है, जिसमें 65% से अधिक हिस्सा टेक्सटाइल का है।

बेरोजगारी का डर: टेक्सटाइल सेक्टर पाकिस्तान में सबसे ज्यादा रोजगार देने वाला क्षेत्र है। डॉ. एजाज के अनुसार, यदि भारतीय प्रतिस्पर्धा के कारण ऑर्डर्स कम हुए, तो टेक्सटाइल और उससे जुड़े उद्योगों में 1 करोड़ से ज्यादा लोग बेरोजगार हो सकते हैं।

प्रतिस्पर्धा में पिछड़ना: भारत के पास बेहतर तकनीक, बड़ा मैन्युफैक्चरिंग बेस और कम उत्पादन लागत है। टैरिफ हटने के बाद पाकिस्तान के लिए भारत का मुकाबला करना लगभग नामुमकिन होगा।

पाकिस्तान सरकार की ‘पैनिक मोड’ में तैयारी

रिपोर्ट्स के अनुसार, इस डील की खबर के बाद शहबाज शरीफ सरकार में हड़कंप मच गया है:

आपातकालीन बैठकें: पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री इशाक डार ने इस स्थिति की समीक्षा के लिए अंतर-मंत्रालयी बैठकें की हैं।

लागत कम करने की चुनौती: पाकिस्तानी उद्योगपतियों ने मांग की है कि सरकार बिजली, गैस और टैक्स की दरों को क्षेत्रीय स्तर (भारत और बांग्लादेश के बराबर) पर लाए, अन्यथा कारखाने बंद करने पड़ेंगे।

सिस्टम की विफलता: नेताओं का मानना है कि पाकिस्तान अपनी आंतरिक अव्यवस्थाओं और महंगी ऊर्जा के कारण पहले ही जूझ रहा था, अब भारत की इस डील ने रही-सही कसर पूरी कर दी है।

भारत और EU के बीच इस समझौते को “मदर ऑफ ऑल डील्स” कहा जा रहा है, जो भारत को वैश्विक सप्लाई चेन का केंद्र बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। वहीं, पाकिस्तान के लिए यह उसकी डूबती अर्थव्यवस्था के लिए एक और बड़ा झटका साबित हो सकता है।

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