ओडिशा में बंगाली मजदूर की मौत पर छिड़ा ‘शब्द युद्ध’, इल्तिजा मुफ्ती के बयान से गरमाई सियासत।”

ओडिशा के संबलपुर में एक पश्चिम बंगाल के प्रवासी मजदूर की हत्या के बाद जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा मुफ्ती के एक बयान ने देश में नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। इल्तिजा ने भारत की तुलना “लिंचिस्तान” से कर दी है, जिस पर भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।
ओडिशा हत्याकांड पर इल्तिजा मुफ्ती का ‘लिंचिस्तान’ वाला बयान: भाजपा ने किया पलटवार
नई दिल्ली/भुवनेश्वर: ओडिशा के संबलपुर में 24 दिसंबर (बुधवार) की रात एक 19 वर्षीय बंगाली प्रवासी मजदूर, ज्वेल शेख की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। इस घटना के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। पीडीपी नेता इल्तिजा मुफ्ती ने इस घटना को लेकर केंद्र सरकार और देश की स्थिति पर विवादित टिप्पणी की है।
1. इल्तिजा मुफ्ती का विवादित बयान
इल्तिजा मुफ्ती ने सोशल मीडिया और अपने बयानों में भारत की वर्तमान स्थिति पर सवाल उठाते हुए इसे “लिंचिस्तान” करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में अल्पसंख्यकों और बंगाली बोलने वाले लोगों को चुन-चुनकर निशाना बनाया जा रहा है। इल्तिजा ने कहा कि केवल “संदेह” के आधार पर किसी की जान ले लेना अब एक पैटर्न बन गया है।
2. क्या था ओडिशा का मामला?
घटना: संबलपुर के शांतिनगर इलाके में ज्वेल शेख और उसके साथियों पर स्थानीय लोगों के एक समूह ने हमला किया।
विवाद की वजह: पुलिस के अनुसार, विवाद ‘बीड़ी’ मांगने को लेकर शुरू हुआ था। हालांकि, पीड़ित परिवार और कुछ राजनीतिक दलों का आरोप है कि हमलावरों ने उनसे आधार कार्ड मांगा और उन्हें “बांग्लादेशी घुसपैठिया” कहकर पीटा।
कार्रवाई: ओडिशा पुलिस ने इस मामले में 6 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और जांच जारी है।
3. भाजपा की कड़ी प्रतिक्रिया
भाजपा ने इल्तिजा मुफ्ती के “लिंचिस्तान” वाले शब्द पर कड़ा ऐतराज जताया है। भाजपा प्रवक्ताओं ने कहा:
* इल्तिजा मुफ्ती और उनकी पार्टी देश की छवि खराब करने के लिए विदेशी एजेंडे पर काम कर रही हैं।
* “लिंचिस्तान” जैसे शब्दों का इस्तेमाल करना 140 करोड़ भारतीयों का अपमान है।
* भाजपा ने आरोप लगाया कि जब कश्मीर में निर्दोषों की हत्या होती है, तब ये नेता चुप रहते हैं, लेकिन अन्य राज्यों की आपराधिक घटनाओं को सांप्रदायिक रंग देने में माहिर हैं।
4. टीएमसी और कांग्रेस ने भी घेरा
केवल इल्तिजा ही नहीं, पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी टीएमसी ने भी इसे “बंगाली विरोधी” हिंसा बताया है। टीएमसी नेताओं का दावा है कि भाजपा शासित राज्यों में बंगाली बोलने वालों को जानबूझकर बांग्लादेशी बताकर प्रताड़ित किया जा रहा है।




