बदल जाएगा काशी का ‘महाश्मशान’: रत्नेश्वर मंदिर से मणिकर्णिका तक ऐसा दिखेगा नजारा, देखिए प्रोजेक्ट की खास बातें।

वाराणसी के विश्वप्रसिद्ध मणिकर्णिका घाट (महाश्मशान) का कायाकल्प अब अंतिम चरणों की ओर बढ़ रहा है। हाल ही में हुई ‘बुलडोजर कार्रवाई’ और पुराने ढांचों को हटाने के बाद इस पावन स्थल का नया भव्य स्वरूप उभरकर सामने आने लगा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन और रूपा फाउंडेशन के सहयोग से हो रहे इस पुनर्विकास का लक्ष्य काशी की प्राचीन विरासत को आधुनिक सुविधाओं के साथ जोड़ना है।
मणिकर्णिका घाट: भविष्य की एक झलक
पुनर्विकास के बाद यह घाट न केवल धार्मिक रूप से भव्य होगा, बल्कि शवयात्रियों और पर्यटकों के लिए बेहद सुविधाजनक भी बनेगा।
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बाढ़ मुक्त दाह संस्कार: नए डिजाइन को ‘हाई फ्लड लेवल’ (HFL) को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। अब गंगा में बाढ़ आने पर भी दाह संस्कार नहीं रुकेगा, क्योंकि ऊंचे प्लेटफॉर्म बनाए जा रहे हैं।
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मल्टी-लेवल सुविधाएं: घाट पर तीन मंजिला भवन बनेगा। इसमें शवयात्रियों के बैठने के लिए VIP लाउंज, स्वच्छ पेयजल, और स्नान कुंड की आधुनिक व्यवस्था होगी।
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ग्रीन श्मशान की ओर कदम: चिताओं से निकलने वाले धुएं को नियंत्रित करने के लिए आधुनिक तकनीक और लकड़ियों के व्यवस्थित भंडारण की जगह होगी।
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हेरिटेज संरक्षण: प्रशासन के अनुसार, रत्नेश्वर महादेव (टेढ़ा मंदिर) और अन्य ऐतिहासिक मंदिरों को संरक्षित करते हुए उनके आसपास के क्षेत्र को खुला और सुंदर बनाया जा रहा है।
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चौड़ी गलियां: मणिकर्णिका से सिंधिया घाट तक की संकरी गलियों को चौड़ा किया जा रहा है ताकि शवयात्राओं के आवागमन में आसानी हो।
ताजा विवाद और प्रशासन का पक्ष
विरासत पर सियासत: कांग्रेस और विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि विकास के नाम पर प्राचीन धरोहरों और लोकमाता अहिल्याबाई होलकर की प्रतिमा को नुकसान पहुँचाया गया है।
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प्रशासन का स्पष्टीकरण: जिलाधिकारी (DM) ने स्पष्ट किया कि किसी भी मंदिर को तोड़ा नहीं गया है। खुदाई के दौरान मिली मूर्तियों और अवशेषों को संस्कृति विभाग ने सुरक्षित रख लिया है, जिन्हें निर्माण पूरा होने के बाद ससम्मान पुनर्स्थापित किया जाएगा।
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स्थानीय विरोध: घाट के आसपास रहने वाले कुछ लोगों ने अपनी रोजी-रोटी और प्राचीन पहचान खोने के डर से विरोध जताया, जिसे प्रशासन ‘गलतफहमी’ बताकर बातचीत से सुलझाने का दावा कर रहा है।
कब तक होगा तैयार?
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लागत: लगभग ₹18 करोड़ (CSR फंड के माध्यम से)।
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डेडलाइन: निर्माण कार्य की समय-सीमा जून 2026 तय की गई है।
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वर्तमान स्थिति: घाट की सीढ़ियों का निर्माण और पुराने जर्जर ढांचों को हटाने का काम युद्धस्तर पर चल रहा है। सामान लाने-ले जाने के लिए गंगा पार विशेष जेट्टी और चेकर्ड प्लेट्स बिछाई गई हैं।
काशी का यह महाश्मशान, जहाँ की अग्नि कभी शांत नहीं होती, अब अपनी प्राचीन गरिमा को बरकरार रखते हुए एक नए ‘कॉरिडोर’ मॉडल में तब्दील हो रहा है। श्री काशी विश्वनाथ धाम के बाद यह परियोजना बनारस के घाटों की तस्वीर पूरी तरह बदल देगी।




