भारत-अमेरिका ट्रेड डील: गेहूं, चावल और डेयरी को रखा गया बाहर, भारतीय किसानों को मिला सुरक्षा कवच।

भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए ऐतिहासिक व्यापार समझौते को लेकर बड़ी जानकारी सामने आ रही है। शीर्ष सरकारी सूत्रों के अनुसार, भारत ने अपनी खाद्य सुरक्षा और किसानों के हितों की रक्षा के लिए कुछ बेहद संवेदनशील कृषि उत्पादों को इस समझौते से पूरी तरह बाहर रखा है।
एक्सक्लूसिव: भारत-अमेरिका ट्रेड डील से ‘बाहर’ रहेंगे गेहूं, चावल और डेयरी; भारत ने सुरक्षित रखा अपना कृषि बाजार
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुए $500 बिलियन के मेगा ट्रेड समझौते की बारीकियां अब धीरे-धीरे सामने आ रही हैं। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपने करोड़ों किसानों की आजीविका पर कोई आंच नहीं आने देगा। इसी के तहत गेहूं, चावल, सोयाबीन और डेयरी उत्पादों को इस डील के दायरे से बाहर (Excluded) रखा गया है।
इन उत्पादों पर नहीं मिलेगी छूट
सूत्रों का कहना है कि अमेरिका भारत के विशाल कृषि बाजार में पैठ बनाना चाहता था, लेकिन भारत ने ‘संवेदनशील’ क्षेत्रों को लेकर कड़ा रुख अपनाया है।
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अनाज: गेहूं, चावल, मक्का और चीनी को रियायती आयात की सूची में शामिल नहीं किया गया है।
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डेयरी: दूध, पनीर, मक्खन और अन्य डेयरी उत्पाद पूरी तरह बाहर हैं, ताकि भारतीय पशुपालकों और ‘अमूल’ जैसे सहकारी संगठनों को नुकसान न हो।
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सोयाबीन: अमेरिकी सोयाबीन के डंपिंग खतरे को देखते हुए इसे भी सुरक्षा कवच में रखा गया है।
क्या है भारत की रणनीति?
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी संकेत दिए हैं कि भारत केवल उन वस्तुओं पर टैरिफ कम करेगा जो भारत में नहीं बनतीं या जिनकी कमी है।
सरकारी सूत्र: “हमारा उद्देश्य ‘पूरक’ व्यापार (Complementary Trade) है, न कि ‘प्रतिस्पर्धी’ व्यापार। हम वही चीजें लेंगे जिनकी हमें जरूरत है, जैसे कि हाई-टेक मशीनरी, विमान और ऊर्जा संसाधन।”
डील की मुख्य उपलब्धियां (अब तक)
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टैरिफ में भारी कटौती: अमेरिका भारतीय सामानों पर लगने वाले 50% के टैरिफ को घटाकर 18% करने पर सहमत हो गया है।
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निर्यात को बढ़ावा: टेक्सटाइल, लेदर, रत्न-आभूषण और फार्मा सेक्टर को अमेरिकी बाजार में बड़ी राहत मिलेगी।
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एनर्जी डील: भारत अब रूस के बजाय अमेरिका और वेनेजुएला से तेल खरीदने पर विचार करेगा।
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$500 बिलियन का लक्ष्य: अगले 5 वर्षों में दोनों देशों के बीच व्यापार को इस विशाल आंकड़े तक ले जाने का संकल्प है।




