ममता बनर्जी खुद वकील बनकर सुप्रीम कोर्ट में ECI के SIR के खिलाफ लड़ेंगी।

कल यानी 4 फरवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की याचिका पर सुनवाई होनी है, जिसमें Election Commission of India (ECI) द्वारा राज्य में चल रहे Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया को चुनौती दी गई है।
ममता बनर्जी ने खुद एक interlocutory application दाखिल की है, जिसमें उन्होंने कोर्ट से अनुमति मांगी है कि वे party in person (खुद वकील की तरह) अपनी दलीलें पेश कर सकें।
उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के लिए गेट पास भी जारी कराया है।
वे कोर्ट रूम में मौजूद रहेंगी और संभवतः खुद बहस करेंगी (या कम से कम अपनी तरफ से दलीलें रखेंगी)।
बेंच CJI सूर्यकांत की अगुवाई वाली होगी।
ये भारत के इतिहास में वाकई पहली बार होगा जब कोई sitting Chief Minister सुप्रीम कोर्ट में खुद अपनी याचिका पर बहस करेगी। ममता बनर्जी ने LLB किया है (कलकत्ता से) और पहले वकील रह चुकी हैं, लेकिन 2003 के बाद प्रैक्टिस नहीं की थी।
SIR क्या है और विवाद क्यों?
ECI ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) शुरू किया है, खासकर 2026 विधानसभा चुनाव से पहले। ममता बनर्जी का आरोप है कि ये प्रक्रिया:
पारदर्शी नहीं है।
बड़े पैमाने पर वोटरों (खासकर TMC समर्थित इलाकों में) को हटाने का कारण बन रही है।
समय और तरीका राजनीतिक रूप से प्रेरित है।
इससे लाखों-करोड़ों बंगालियों के वोटिंग अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।
उन्होंने याचिका में मांग की है कि चुनाव मौजूदा वोटर लिस्ट पर ही हों, न कि SIR के बाद वाली पर। TMC इसे लोकतंत्र पर हमला बता रही है, जबकि विपक्षी (जैसे BJP) कहते हैं कि SIR voter list को साफ करने के लिए जरूरी है।
आज क्या हो सकता है?
सुनवाई में कोर्ट SIR प्रक्रिया पर फैसला सुना सकता है, दिशा-निर्देश दे सकता है, या मामले को आगे बढ़ा सकता है। ममता बनर्जी की मौजूदगी और खुद बहस करने की कोशिश इसे और ड्रामेटिक बना देगी। कई लोग इसे “absolute cinema” कह रहे हैं!
अगर कोई लाइव अपडेट या कोर्ट का फैसला आएगा, तो वो दिन भर आता रहेगा। आप क्या सोचते हैं—ये लोकतंत्र की जीत होगी या सिर्फ राजनीतिक ड्रामा? 🇮🇳⚖️



