“कंगाली में आटा गीला! अपनी एयरलाइन बेचने निकला पाकिस्तान, ऐन मौके पर सेना की कंपनी ने दिया झटका”।

पाकिस्तान की राष्ट्रीय एयरलाइन पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस (PIA) की नीलामी को लेकर आज, 23 दिसंबर 2025 को बड़ी हलचल है। यह नीलामी पाकिस्तान के लिए न केवल आर्थिक बल्कि राजनीतिक रूप से भी एक बड़ा मोड़ साबित हो सकती है।
नीलामी की मुख्य बातें
लाइव नीलामी: पाकिस्तान सरकार पहली बार अपनी राष्ट्रीय एयरलाइन की नीलामी का सीधा प्रसारण (Live Streaming) कर रही है ताकि पारदर्शिता बनी रहे और दुनिया देख सके कि पाकिस्तान अपने आर्थिक सुधारों के लिए कितना गंभीर है।
सेना से जुड़ी कंपनी बाहर: नीलामी से ठीक पहले पाकिस्तान सेना से जुड़ी फौजी फर्टिलाइजर कंपनी (Fauji Fertilizer) ने अपना नाम वापस ले लिया है। इस कंपनी ने शनिवार की समय सीमा तक जरूरी ‘अर्नेस्ट मनी’ जमा नहीं की, जिसे नीलामी प्रक्रिया के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
हिस्सेदारी की बिक्री: सरकार पीआईए में अपनी 100% हिस्सेदारी बेचने की तैयारी में है। शुरुआती चरण में 75% हिस्सेदारी के लिए बोली लगाई जा रही है, और विजेता बोलीदाता को शेष 25% खरीदने का विकल्प भी दिया जाएगा।
अब दौड़ में कौन सी 3 कंपनियां हैं?
सेना की कंपनी के हटने के बाद अब मुख्य रूप से तीन बड़े कंसोर्टियम (समूह) मैदान में बचे हैं:
एयर ब्लू (AirBlue): पाकिस्तान की एक निजी एयरलाइन कंपनी।
लकी सीमेंट कंसोर्टियम: इसमें लकी सीमेंट के साथ हब पावर होल्डिंग्स और कोहात सीमेंट जैसी बड़ी कंपनियां शामिल हैं।
आरिफ हबीब कॉर्पोरेशन: इस समूह में फातिमा फर्टिलाइजर और सिटी स्कूल जैसे संस्थान शामिल हैं।
नीलामी क्यों हो रही है?
IMF का दबाव: अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने $7 बिलियन के बेलआउट पैकेज के लिए शर्त रखी थी कि घाटे में चल रहे सरकारी संस्थानों (जैसे PIA) का निजीकरण किया जाए।
भारी कर्ज: पीआईए वर्तमान में लगभग 800 अरब पाकिस्तानी रुपये के कर्ज में डूबी हुई है।
शर्तें: नीलामी की एक खास शर्त यह है कि सरकार को कुल बोली का केवल 7.5% नकद (Cash) मिलेगा, जबकि बाकी 92.5% रकम सीधे एयरलाइन में निवेश करनी होगी ताकि कंपनी को फिर से खड़ा किया जा सके।
कर्मचारियों का क्या होगा?
सरकार ने कर्मचारियों को आश्वासन दिया है कि नई कंपनी के आने के बाद भी एक साल तक उनकी नौकरी सुरक्षित रहेगी। इसके बाद, नई मैनेजमेंट अपने हिसाब से फैसला ले सकेगी। पेंशन और सेवानिवृत्ति के बाद की देनदारियों का प्रबंधन सरकार की ‘होल्डिंग कंपनी’ द्वारा किया जाएगा।




