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अहंकार तो रावण का भी नहीं रहा…” – शंकराचार्य से प्रमाण पत्र मांगने पर भड़के अखिलेश, योगी सरकार को घेरा

प्रयागराज के माघ मेले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और मेला प्रशासन के बीच उपजा विवाद अब बड़े राजनीतिक टकराव का रूप ले चुका है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस मुद्दे पर राज्य सरकार को आड़े हाथों लिया है।

 

“क्या संतों पर लाठियां चलाना एक ‘योगी’ को शोभा देता है?”

लखनऊ/प्रयागराज: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने प्रयागराज प्रशासन द्वारा शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के साथ किए गए व्यवहार की कड़े शब्दों में निंदा की है। लखनऊ में पत्रकारों से बातचीत और सोशल मीडिया के माध्यम से अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर सीधा निशाना साधा।

मुख्य घटनाक्रम: माघ मेले में क्या हुआ?

मौनी अमावस्या के पावन पर्व पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद अपने अनुयायियों के साथ रथ (पालकी) पर सवार होकर संगम स्नान के लिए जा रहे थे। प्रशासन ने सुरक्षा और परंपरा का हवाला देते हुए उन्हें बीच रास्ते में रोक दिया।

प्रशासन का तर्क: मेला अधिकारियों का कहना है कि भीड़ और कोहरे के कारण ‘नो व्हीकल ज़ोन’ में रथ ले जाने की अनुमति नहीं थी।

शंकराचार्य का आरोप: स्वामी जी का आरोप है कि उन्हें अपमानित किया गया और उनके शिष्यों पर पुलिस ने बर्बरतापूर्वक लाठीचार्ज किया, जिसमें कई लोग घायल हुए।

ताजा विवाद: इसके बाद प्रशासन ने एक नोटिस जारी कर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से उनके ‘शंकराचार्य’ पद के उपयोग पर स्पष्टीकरण मांगा है, जिसे सपा और अन्य विपक्षी दलों ने सनातन धर्म का अपमान बताया है।

अखिलेश यादव के तीखे सवाल

अखिलेश यादव ने इस पूरे घटनाक्रम को ‘अलोकतांत्रिक’ और ‘अधार्मिक’ करार दिया। उन्होंने मुख्यमंत्री पर तंज कसते हुए कहा—-

“यह घोर निंदनीय है कि एक ‘योगी’ के मुख्यमंत्री रहते हुए संतों को संगम स्नान से रोका जाए और उन पर लाठियां चलाई जाएं। क्या भाजपा की सरकार में संतों का अपमान होना ही नई परंपरा है? जो लोग खुद को सनातन का रक्षक बताते हैं, वही आज जगद्गुरुओं से उनके पद का प्रमाण पत्र मांग रहे हैं।”

 

 

राजनीतिक प्रतिक्रिया और समर्थन

सनातन परंपरा पर प्रहार: अखिलेश यादव ने कहा कि शंकराचार्य और संत समाज हमारी संस्कृति की शोभा हैं। भाजपा सरकार अपने अधिकारियों के माध्यम से जानबूझकर संतों को अपमानित कर रही है।

विपक्ष की मांग: सपा प्रमुख ने मांग की कि सरकार को इस दुर्व्यवहार के लिए तुरंत माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने ट्वीट किया— “क्षमा वीरस्य भूषणम्” यानी क्षमा मांगना वीरों का आभूषण है, भाजपा को अपना अहंकार छोड़ना चाहिए।

विधिक चेतावनी: उधर, शंकराचार्य के अधिवक्ता ने प्रशासन को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है कि वे अपना नोटिस वापस लें, अन्यथा वे अदालत का रुख करेंगे।

वर्तमान स्थिति

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद अभी भी अपने शिविर के बाहर धरने पर बैठे हैं। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे पर अखिलेश यादव के सुर में सुर मिलाया है, जिससे आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश की राजनीति में ‘धर्म और राजनीति’ का यह संगम और गरमाने के आसार हैं।

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