वैश्विक व्यापार में फिर हलचल: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत समेत 60 देशों पर लगाया 10 से 12.5% अतिरिक्त टैरिफ

वाशिंगटन:
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने वैश्विक व्यापार नीति को लेकर एक और बड़ा कदम उठाया है। अमेरिका ने भारत सहित दुनिया के लगभग 60 देशों पर 10% से 12.5% तक का नया अतिरिक्त सीमा शुल्क (टैरिफ) लगाने का आदेश जारी कर दिया है। इस नए फैसले के तहत भारत पर 10 प्रतिशत का अतिरिक्त टैरिफ लागू होगा।
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) जैमीसन ग्रीर द्वारा जारी इस आदेश के बाद यह नई व्यवस्था शुक्रवार रात 12:01 बजे से प्रभावी हो गई है।
क्यों लगाया गया यह अतिरिक्त शुल्क?
अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई ‘ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 301’ (Section 301) के तहत की गई है। वाशिंगटन का आरोप है कि ये 60 देश अपने बाजारों में ‘बंधुआ मजदूरी’ (Forced Labour) या जबरन श्रम से बने उत्पादों के आयात और आपूर्ति पर प्रभावी रोक लगाने में विफल रहे हैं, जिससे वैश्विक व्यापार प्रभावित होता है।
पहले अमेरिका ने भारत पर 12.5% टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा था। हालांकि, भारत द्वारा अपनी विदेश व्यापार नीति (Foreign Trade Policy) में संशोधन कर बंधुआ मजदूरी से बने सामानों के आयात पर रोक लगाने के लिए उठाए गए कदमों को देखते हुए अमेरिका ने भारत के लिए यह दर घटाकर 10% कर दी।
दो स्लैब में बंटे दुनिया के देश
अमेरिकी प्रशासन ने 60 देशों को दो श्रेणियों में बांटा है:
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10% टैरिफ स्लैब: भारत, ब्रिटेन, कनाडा, बांग्लादेश, पाकिस्तान, इंडोनेशिया और मेक्सिको सहित 17 देश इस श्रेणी में शामिल हैं। इन देशों ने जबरन श्रम पर आंशिक प्रतिबंध या कड़े कानून बनाने की दिशा में कदम उठाए हैं।
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12.5% टैरिफ स्लैब: चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, यूरोपीय संघ (EU), स्विट्जरलैंड और ब्राजील सहित 43 देशों पर 12.5% का उच्च शुल्क लगाया गया है।
भारत और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर
अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार है। भारतीय वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार काफी बड़ा है, जिसमें भारत का अमेरिका को निर्यात अरबों डॉलर का है।
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भारतीय निर्यातकों की चिंता: कपड़ा (Textiles), रत्न एवं आभूषण (Gems & Jewellery), इंजीनियरिंग सामान और फार्मास्यूटिकल्स जैसे प्रमुख भारतीय क्षेत्रों पर इस अतिरिक्त 10% ड्यूटी का असर पड़ सकता है, जिससे अमेरिकी बाजार में भारतीय सामान महंगे हो सकते हैं।
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वैश्विक विरोध: कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और यूरोपीय देशों ने अमेरिका के इस एकतरफा फैसले पर चिंता जताई है और चेतावनी दी है कि इससे वैश्विक सप्लाई चेन (सप्लाई नेटवर्क) में अस्थिरता आ सकती है।
हालांकि, भारतीय अधिकारियों का कहना है कि भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार वार्ता जारी है और भारत इस मुद्दे को अमेरिकी प्रशासन के सामने कूटनीतिक स्तर पर मजबूती से उठा रहा है।




