अच्छे दिन का नया मॉडल: अब अस्पताल भी बिकाऊ हैं!!

उत्तर प्रदेश में सरकारी अस्पतालों को बेचने की शुरुआत अगर इन चार अस्पतालों से हुई है, जिनमें टांडा का अस्पताल भी शामिल है, तो इसे विकास का एक और ऐतिहासिक अध्याय ही कहा जाएगा!!
वाह रे व्यवस्था!! जनता टैक्स दे, मरीज इलाज के लिए भटके और सरकार अस्पतालों को ही बेचने की तैयारी करे!! कल तक सरकारी अस्पताल जनता की जीवनरेखा हुआ करते थे, अब लगता है कि वे भी सरकारी खजाने का बोझ बन गए हैं!!
अस्पतालों में डॉक्टर, दवाइयाँ और सुविधाएँ बढ़ाने के बजाय अगर अस्पतालों को ही निजी हाथों में सौंपना समाधान है, तो फिर सरकारी अस्पताल बनाने पर जनता का पैसा खर्च ही क्यों किया गया था…?
जनता बीमार हो तो इलाज के लिए जेब टटोले, और सरकार अस्पताल बचाने के बजाय बेचने का रास्ता टटोले!!
सवाल सीधा है—सरकारी अस्पताल जनता की सेवा के लिए हैं या बिक्री की सूची में शामिल करने के लिए….?
याद रखिए, अस्पताल सिर्फ इमारत नहीं होते, गरीब की आखिरी उम्मीद होते हैं। उस उम्मीद का सौदा करना विकास नहीं, जनहित पर गंभीर सवाल खड़ा करना है!!




