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लोकसभा में बिल पेश ऑफ़िस के बाद बॉस का फोन न उठाने का दिया हक

एक तरफ तो देश में 70 घंटे काम करने को लेकर बहस चल रही है. कुछ लोग इसके पक्ष में हैं तो वहीं GenZ वर्ग इसके खिलाफ है. इस डिबेट में वो ‘पर्सनल लाइफ, मी टाइम, वर्क लाइफ बैलेंस’ जैसे तर्कों का इस्तेमाल करता है. इन सब के बीच लोकसभा में एक बिल पेश हुआ है जो ऑफिस के बाद या छुट्टी के दिन बॉस का फोन ना उठाने और काम से संबंधित किसी मेल का जवाब ना देने के अधिकार की पैरवी करता है.

 

लोकसभा में शुक्रवार को एक प्राइवेट मेंबर बिल पेश किया गया, जिसका उद्देश्य कर्मचारियों को ऑफिस समय के बाहर काम से जुड़े फोन कॉल और ईमेल का जवाब देने से छूट देना है. लोकसभा और राज्यसभा- दोनों सदनों के सदस्य ऐसे मुद्दों पर प्राइवेट मेंबर बिल ला सकते हैं, जिन पर वे महसूस करते हैं कि सरकार को कानून बनाना चाहिए. हालांकि अधिकतर मामलों में सरकार की प्रतिक्रिया के बाद ये बिल वापस ले लिए जाते हैं.

 

एनसीपी की सांसद सुप्रिया सुले ने ‘राइट टू डिस्कनेक्ट बिल, 2025’ पेश किया. यह बिल कर्मचारियों के लिए वेलफेयर अथॉरिटी बनाने और हर कर्मचारी को ऑफिस समय के बाद और छुट्टियों के दौरान काम से जुड़े कॉल और ईमेल से पूरी तरह दूर रहने का अधिकार देने का प्रस्ताव करता है. इसमें ऐसे कॉल या ईमेल का जवाब न देने का अधिकार भी शामिल है.

 

बिल के प्रावधानों के अनुसार, किसी भी तरह की अवहेलना (नॉन- कम्प्लायंस) की स्थिति में संबंधित संस्था (कंपनी या सोसायटी) पर उसके कर्मचारियों के कुल पारिश्रमिक (टोटल रेम्यूनरेशन) का 1 प्रतिशत जुर्माना लगाया जाएगा. बिल हर कर्मचारी को काम से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक कम्युनिकेशन- जैसे कॉल, ईमेल और मैसेज – से दूर रहने का अधिकार देता है.

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