स्मार्ट मीटर या ‘सफेद हाथी’? बिजली उपभोक्ताओं पर गिरा बिल का बम, 5 गुना तक बढ़ी वसूली

सुल्तानपुर/उत्तर प्रदेश: प्रदेश में बिजली व्यवस्था को सुधारने और पारदर्शिता लाने के दावे के साथ लगाए गए स्मार्ट प्रीपेड मीटर अब उपभोक्ताओं के लिए जी का जंजाल बनते जा रहे हैं। उत्तर प्रदेश के कई जिलों से बिजली बिल में भारी गड़बड़ी की खबरें सामने आ रही हैं, जिससे विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार, जिन घरों में पुराने मीटर हटाकर नए स्मार्ट मीटर लगाए गए हैं, वहां बिजली का बिल अचानक 5 से 6 गुना तक बढ़ गया है। उपभोक्ता इस बात से हैरान हैं कि उनकी खपत में कोई बदलाव नहीं हुआ है, फिर भी बिल हजारों में आ रहा है। कई मामलों में तो एक ही दिन में मीटर की रीडिंग में अप्रत्याशित उछाल देखा गया है।
विभाग की सफाई: अब होगा ‘चेक मीटर’ से मिलान
लगातार बढ़ती शिकायतों और बढ़ते जन-आक्रोश को देखते हुए विद्युत विभाग अब बैकफुट पर नजर आ रहा है। विभाग ने इस गड़बड़ी की जांच के लिए ‘चेक मीटर’ लगाने का निर्णय लिया है।
- चेक मीटर क्या है? यह स्मार्ट मीटर के साथ ही लगाया जाने वाला एक समानांतर मीटर होगा, जो यह जांचेगा कि स्मार्ट मीटर की रीडिंग सही है या नहीं।
- यदि दोनों मीटर की रीडिंग में अंतर पाया जाता है, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि स्मार्ट मीटर में तकनीकी खामी (फॉल्ट) है।
जनता में भारी रोष
स्थानीय उपभोक्ताओं का कहना है कि एक तरफ सरकार ने हाल ही में स्मार्ट मीटर की अनिवार्यता को वैकल्पिक बनाया है, वहीं दूसरी ओर पहले से लगे मीटर लोगों की जेबें काट रहे हैं। उपभोक्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इन गलत बिलों को सुधारा नहीं गया और मीटर की तकनीकी खामियों को दूर नहीं किया गया, तो वे बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
प्रमुख बिंदु (हेडलाइंस के लिए):
- बड़ा झटका: पुराने मीटर के मुकाबले स्मार्ट मीटर का बिल आया 5-6 गुना ज्यादा।
- जांच शुरू: गड़बड़ी पकड़ने के लिए विभाग लगाएगा ‘चेक मीटर’।
- तकनीकी खामी: क्या स्मार्ट मीटर की चिप में है गड़बड़ी? उपभोक्ता परेशान।




