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भ्रष्टाचार और महिला उत्पीड़न के आरोपी अधिकारी को शह! जांच समिति के गठन के 8 महीने बाद भी कार्रवाई शून्य, अपना दल (एस) ने खोला मोर्चा

सुलतानपुर। उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर जिले के दूबेपुर ब्लॉक में तैनात ग्राम पंचायत अधिकारी और प्रभारी एडीओ (पी) दिनेश सिंह पर लगे गंभीर आरोपों को लेकर शासन-प्रशासन का रवैया बेहद उदासीन और संदेहास्पद बना हुआ है। अधिकारी पर भ्रष्टाचार, महिला उत्पीड़न और आम जनता से अभद्र व्यवहार करने जैसे संगीन आरोप हैं, लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि 8 महीने बीत जाने के बाद भी जिला प्रशासन ने उनके खिलाफ कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। इस ढुलमुल नीति से नाराज सत्ताधारी दल ‘अपना दल (एस)’ के जिला महासचिव शिवेन्द्र विक्रम सिंह ने सुलतानपुर के जिलाधिकारी (DM) को एक कड़ा पत्र लिखकर व्यवस्था को कटघरे में खड़ा किया है।

8 महीने से फाइलों में दबी है जांच

​लेटर पैड (पत्रांक: 0027/26, दिनांक: 27/05/2026) के जरिए सामने आई जानकारी के अनुसार, दूबेपुर ब्लॉक के ग्राम ऊधड़पुर निवासी शिकायतकर्ता विजय सहित कई लोगों ने दिनेश सिंह के खिलाफ मोर्चा खोला था। इसके बाद अपना दल (एस) के जिला महासचिव ने भी अपने लेटर पैड पर इस मामले में कड़ा विरोध दर्ज कराया था। इसके दबाव में डीपीआरओ (DPRO) द्वारा एक जांच समिति का गठन किया गया था, जिसे जिलाधिकारी स्तर से महज एक सप्ताह के भीतर जांच पूरी करने के निर्देश दिए गए थे।

बड़ा सवाल: जब एक हफ्ते में जांच पूरी करने का आदेश था, तो आज 8 महीने बीत जाने के बाद भी पीड़ित शिकायतकर्ता को न्याय क्यों नहीं मिला? क्या आरोपी अधिकारी को प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त है?

 

पदों पर बने रहने और स्थानांतरण न होने पर उठे सवाल

​शिकायत के बावजूद दिनेश सिंह को एडीओ पंचायत का प्रभार सौंपे रखना और उनका स्थानांतरण न करना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। शिवेन्द्र विक्रम सिंह ने जिलाधिकारी से बेहद कड़े शब्दों में मांग की है कि:

  • ​आरोपी दिनेश सिंह के खिलाफ तत्काल प्रभाव से निष्पक्ष विभागीय जांच शुरू की जाए।
  • ​निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए एडीओ पंचायत का प्रभार किसी अन्य व्यक्ति को तुरंत सौंपा जाए।
  • ​आरोपी अधिकारी पर उचित विधिक (कानूनी) कार्रवाई की जाए।

मुख्यमंत्री दरबार तक गूंजेगी आवाज

​मामले की गंभीरता और प्रशासनिक ढिलाई को देखते हुए इस शिकायत की प्रतिलिपि (Copy) उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री (लखनऊ) और माननीय प्रदेश अध्यक्ष, अपना दल (एस) को भी भेजी गई है। साफ़ है कि यदि जिला प्रशासन ने अब भी इस मामले पर आंखें मूंदे रखीं, तो यह मामला शासन स्तर पर तूल पकड़ेगा। जनता और पीड़ित अब यह पूछ रहे हैं कि भ्रष्टाचार और महिला उत्पीड़न जैसे संवेदनशील मामलों पर जीरो टॉलरेंस की बात करने वाली सरकार में ऐसे अधिकारियों पर लगाम कब कसी जाएगी?

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