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फर्जी हस्ताक्षर कांड: शुभेंदु अधिकारी की प्रेस कॉन्फ्रेंस के तुरंत बाद TMC की बड़ी कार्रवाई, दो विधायक पार्टी से निष्कासित

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में सोमवार (1 जून, 2026) को उस समय बड़ा भूचाल आ गया, जब मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की प्रेस कॉन्फ्रेंस के तुरंत बाद अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने अपने दो विधायकों को पार्टी से निष्कासित कर दिया। ‘फर्जी हस्ताक्षर कांड’ में नाम सामने आने के बाद टीएमसी ने एंटाली से विधायक संदीपन साहा और उलूबेरिया पूर्व से विधायक ऋतब्रत बनर्जी को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में प्राथमिक सदस्यता से बाहर का रास्ता दिखा दिया।
​यह कार्रवाई इतनी तेजी से हुई कि मुख्यमंत्री की प्रेस कॉन्फ्रेंस खत्म होने के महज 15 मिनट के भीतर पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष चंद्रिमा भट्टाचार्य के हस्ताक्षर वाला निष्कासन पत्र जारी कर दिया गया।
​मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने किया था बड़ा खुलासा
​इससे पहले राज्य सचिवालय (नबन्ना) में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सीधे तौर पर टीएमसी को कटघरे में खड़ा किया। मुख्यमंत्री ने खुलासा किया कि विधानसभा में शोभनदेव चट्टोपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष (LoP) बनाने के लिए टीएमसी की तरफ से जो समर्थन पत्र सौंपा गया था, वह पूरी तरह फर्जी और मनगढ़ंत था।

​मुख्यमंत्री ने बताया:

​टीएमसी ने विधानसभा सचिवालय को 70 विधायकों के हस्ताक्षर वाला एक प्रस्ताव पत्र सौंपा था, जिसमें 14 हस्ताक्षर ब्लॉक अक्षरों में थे।
​टीएमसी के ही दो विधायकों— ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा— ने 27 मई को विधानसभा अध्यक्ष के सामने लिखित शिकायत दर्ज कराई कि 6 मई को ऐसी कोई बैठक ही नहीं हुई थी और प्रस्ताव पत्र पर उनके फर्जी हस्ताक्षर किए गए हैं।
​गृह सचिव की सिफारिश और मुख्यमंत्री की मंजूरी के बाद इस मामले की जांच राज्य सीआईडी (CID) को सौंप दी गई है। सीआईडी ने हैंडराइटिंग एक्सपर्ट्स की मौजूदगी में 13 टीएमसी विधायकों से पूछताछ की है, जिसमें से तीन विधायकों (बहारुल इस्लाम, अरूप रॉय और सुभाशीष दास) ने स्पष्ट किया है कि पत्र पर मौजूद हस्ताक्षर उनके नहीं हैं। विधायक बहारुल इस्लाम तो उस दिन कोलकाता में मौजूद भी नहीं थे।

​टीएमसी ने कार्रवाई के पीछे क्या तर्क दिया?

​पार्टी विरोधी गतिविधियों और अनुशासनहीनता का हवाला देते हुए टीएमसी ने दोनों विधायकों को तुरंत निष्कासित कर दिया। चंद्रिमा भट्टाचार्य द्वारा जारी नोटिस में कहा गया:

​”यह संज्ञान में आया है कि अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (AITC) के टिकट पर चुनाव जीतने के बावजूद आप दोनों लगातार अधिकृत नेतृत्व द्वारा बुलाई गई बैठकों से नदारद रहे हैं। इसके अलावा आप ऐसी गतिविधियों और बयानों में शामिल पाए गए हैं जो पार्टी के हितों के खिलाफ (Prejudicial) हैं।”

​गौरतलब है कि एक दिन पहले ही (रविवार को) मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आवास पर बुलाई गई टीएमसी विधायक दल की महत्वपूर्ण बैठक में 80 में से 61 विधायक गायब रहे थे, जिसके कारण बैठक को रद्द करना पड़ा था। संदीपन साहा और ऋतब्रत बनर्जी भी इस बैठक में शामिल नहीं हुए थे।
​निष्कासन पर विधायकों और टीएमसी की प्रतिक्रिया
​पार्टी से निकाले जाने के तुरंत बाद विधायक संदीपन साहा ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा:

​”अगर हमें नैतिकता की बात करने और सच का साथ देने के लिए पार्टी से निकाला गया है, तो हम इस फैसले से बेहद खुश हैं। इस पार्टी में जो भी नैतिकता की बात करेगा, उसे पार्टी विरोधी मान लिया जाएगा क्योंकि पार्टी खुद किसी नैतिक आचरण पर नहीं चलती।”

​दूसरी तरफ, टीएमसी प्रवक्ता कुणाल घोष ने पार्टी के फैसले का बचाव करते हुए कहा कि अगर विधायकों को कोई शिकायत थी, तो उन्हें सीधे विधानसभा अध्यक्ष के पास जाने के बजाय पार्टी नेतृत्व (ममता बनर्जी) से बात करनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि शुभेंदु अधिकारी द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस में इन दोनों विधायकों का नाम सार्वजनिक किए जाने से यह साबित हो गया कि ये दोनों विपक्ष के साथ मिलकर काम कर रहे थे।

​पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के नतीजों के बाद टीएमसी को करारी हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद वरिष्ठ नेता शोभनदेव चट्टोपाध्याय को विधानसभा में टीएमसी विधायक दल का नेता और नेता प्रतिपक्ष (LoP) मनोनीतः करने के लिए एक पत्र तैयार किया गया। आरोप है कि इस पत्र पर कई विधायकों की सहमति के बिना उनके फर्जी हस्ताक्षर (Forged Signatures) किए गए। अब इस मामले की जांच के लिए एसआईटी (SIT) का गठन किया गया है और सीआईडी इस जालसाजी की गहराई से जांच कर रही है। इस मामले में टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी को भी समन जारी किया गया था, लेकिन उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर पेश होने से इनकार कर दिया।

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