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शंकराचार्य के अपमान पर भड़के कांग्रेस नेता वरुण मिश्रा; बोले- स्वामी जी के सम्मान के लिए जान भी दे देंगे

प्रयागराज के माघ मेले में ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और प्रशासन के बीच उपजे विवाद ने अब बड़ा राजनीतिक रूप ले लिया है। कांग्रेस नेता वरुण मिश्रा ने इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए स्वामी जी के प्रति गहरी सहानुभूति जताई है।

शंकराचार्य के अपमान पर कांग्रेस का कड़ा रुख: वरुण मिश्रा का बड़ा बयान

प्रयागराज/सुलतानपुर: माघ मेले के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ हुए कथित दुर्व्यवहार और उनके ‘शंकराचार्य’ पद को लेकर प्रशासन द्वारा जारी किए गए नोटिस के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। इस कड़ी में कांग्रेस नेता वरुण मिश्रा ने स्वामी जी का पुरजोर समर्थन करते हुए सरकार और प्रशासन पर संतों के अपमान का आरोप लगाया है।

वरुण मिश्रा ने क्या कहा?

वरुण मिश्रा ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के प्रति अपनी निष्ठा व्यक्त करते हुए कहा कि एक सच्चे सनातनी और धर्मगुरु का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उनके बयान के मुख्य अंश इस प्रकार हैं:

सहानुभूति और बलिदान का संकल्प: वरुण मिश्रा ने भावुक होते हुए कहा, “स्वामी जी सनातन धर्म के ध्वजवाहक हैं। उनके सम्मान की रक्षा के लिए यदि हमें अपनी जान भी देनी पड़े, तो हम पीछे नहीं हटेंगे।”

प्रशासन पर हमला: उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के इशारे पर प्रशासन संतों को प्रताड़ित कर रहा है। शाही स्नान से रोकना और उनके पद पर सवाल उठाना करोड़ों हिंदुओं की आस्था पर चोट है।

तानाशाही का आरोप: कांग्रेस नेता ने इसे ‘सत्ता का अहंकार’ बताते हुए कहा कि जो सरकार साधु-संतों का सम्मान नहीं कर सकती, उसे सत्ता में रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।

विवाद की पृष्ठभूमि

यह विवाद तब शुरू हुआ जब प्रयागराज माघ मेला प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को एक नोटिस जारी कर उनके ‘शंकराचार्य’ पद की वैधता पर सवाल उठाए। इसके बाद:

  •  स्वामी जी और उनके शिष्यों ने प्रशासन पर मारपीट और गाली-गलौज के गंभीर आरोप लगाए।

 

  •  विरोध स्वरूप स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अन्न-जल त्याग कर धरने पर बैठ गए थे।

 

  •  कांग्रेस सहित विपक्षी दलों (सपा आदि) ने इस मुद्दे को हाथों-हाथ लिया और इसे ‘संतों का अपमान’ करार दिया।

राजनीतिक गलियारों में हलचल

वरुण मिश्रा के इस बयान के बाद स्थानीय स्तर पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं में जोश देखा जा रहा है। सुल्तानपुर, जौनपुर और प्रतापगढ़ जैसे जिलों में भी कांग्रेस नेताओं ने विरोध प्रदर्शन कर प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि सरकार धर्म के नाम पर राजनीति तो करती है, लेकिन वास्तविक धर्मगुरुओं का तिरस्कार कर रही है।

 

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पहले भी अपने बेबाक बयानों और राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा जैसे आयोजनों पर अपनी शास्त्रसम्मत राय रखने के कारण चर्चा में रहे हैं।

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