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महाराष्ट्र: परभणी के हनुमान मंदिर में बड़ा हादसा, निर्माणाधीन सभा मंडप की छत गिरने से कई श्रद्धालुओं की मौत, राहत कार्य जारी

परभणी (महाराष्ट्र): महाराष्ट्र के परभणी जिले से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। यहाँ के मानवत तालुका स्थित यशवाड़ी गांव में शनिवार (20 जून) दोपहर को एक प्रसिद्ध हनुमान मंदिर के निर्माणाधीन सभा मंडप की छत अचानक भरभराकर गिर गई। शनिवार होने के कारण मंदिर में दर्शन के लिए भारी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे, जिसके चलते मलबे में कई लोगों के दबे होने की गंभीर घटना सामने आई है।

प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, इस दिल दहला देने वाले हादसे में अब तक कम से कम 5 से 7 श्रद्धालुओं की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 17 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं।

कैसे हुआ हादसा?

चश्मदीदों और स्थानीय प्रशासन के मुताबिक, यशवाड़ी देवस्थान के हनुमान मंदिर के गर्भगृह के ठीक सामने एक बड़े सभा मंडप (असेंबली हॉल) का निर्माण कार्य चल रहा था। निर्माण में राजस्थान के बेहद भारी और बड़े गुलाबी पत्थरों (Pink Stones) का इस्तेमाल किया जा रहा था। शनिवार का दिन होने के कारण मंदिर परिसर में भारी भीड़ थी। स्थानीय लोगों की भारी मांग पर मंदिर को दर्शन के लिए खोल दिया गया था।

दोपहर के समय अचानक मचान (Scaffolding) का सपोर्ट टूटने से भारी-भरकम छत और पत्थरों का एक बड़ा हिस्सा नीचे खड़े श्रद्धालुओं पर आ गिरा। भारी पत्थरों के नीचे दबने से लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला और मौके पर चीख-पुकार मच गई।

युद्ध स्तर पर राहत और बचाव कार्य

हादसे की जानकारी मिलते ही स्थानीय ग्रामीण, पुलिस प्रशासन और आपदा प्रबंधन (Disaster Management) की टीमें तुरंत मौके पर पहुंच गईं।

भारी मशीनें और एम्बुलेंस: मलबे को हटाने के लिए 5 से ज्यादा भारी क्रेन और पोकलेन मशीनें तैनात की गई हैं। इसके साथ ही घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाने के लिए करीब 50 एम्बुलेंस की व्यवस्था की गई है।

अस्पताल में अलर्ट: सभी घायलों को पास के विभिन्न अस्पतालों और जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ डॉक्टरों की टीम लगातार इलाज में जुटी है। कुछ घायलों की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है।

प्रशासन और मंत्रियों का बयान

परभणी जिले की पालक मंत्री मेघना बोर्डिकर ने घटना पर गहरा दुख जताते हुए कहा:

“घटना की जानकारी मिलते ही जिला कलेक्टर, पुलिस प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को तुरंत मौके पर पहुंचने के निर्देश दिए गए। राहत कार्य युद्ध स्तर पर जारी है। पीड़ित परिवारों और घायलों को सरकार की तरफ से हर संभव वित्तीय और चिकित्सा सहायता दी जाएगी।”

स्थानीय प्रशासन अब इस बात की जांच कर रहा है कि निर्माणाधीन ढांचे में सुरक्षा मानकों की अनदेखी क्यों की गई और निर्माण कार्य पूरा होने से पहले इतनी भारी भीड़ को वहाँ आने की अनुमति कैसे दी गई।

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