महिला आरक्षण बिल: पीएम मोदी ने अखिलेश यादव को बताया ‘पुराना दोस्त’, विपक्ष पर साधा निशाना

नई दिल्ली: संसद के विशेष सत्र के दौरान ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ (महिला आरक्षण बिल) पर चर्चा ने उस वक्त एक दिलचस्प मोड़ ले लिया जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव को अपना “दोस्त” संबोधित किया। सदन में इस बयान के बाद माहौल थोड़ा हल्का हुआ, लेकिन पीएम ने महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर विपक्ष को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
‘अखिलेश मेरे अच्छे दोस्त हैं’
चर्चा के दौरान जब विपक्षी खेमे से टोका-टाकी हुई, तो प्रधानमंत्री मोदी ने मुस्कुराते हुए सपा सांसद धर्मेंद्र यादव की ओर इशारा किया। उन्होंने बड़े ही आत्मीय अंदाज में कहा:
> “धर्मेंद्र जी, मैं आपका आभारी हूं… और अखिलेश यादव तो मेरे बहुत अच्छे दोस्त हैं।”>
पीएम के इस बयान पर सदन में ठहाके लगे। हालांकि, राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस ‘दोस्ती’ वाले बयान के जरिए पीएम ने यह संदेश देने की कोशिश की कि विकास और महिला अधिकारों जैसे गंभीर मुद्दों पर राजनीति से ऊपर उठकर बात होनी चाहिए।
विरोध करने वालों को महिलाएं कभी माफ नहीं करेंगी
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने उन राजनीतिक दलों पर कड़ा प्रहार किया जिन्होंने अतीत में इस बिल की राह में रोड़े अटकाए थे। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जो लोग आज भी इस बिल में कमियां निकाल रहे हैं या इसका विरोध कर रहे हैं, उन्हें देश की माताएं और बहनें कभी माफ नहीं करेंगी।
प्रधानमंत्री के भाषण के मुख्य बिंदु:
ऐतिहासिक अवसर: पीएम ने इसे भारत के लोकतांत्रिक इतिहास का एक स्वर्णिम क्षण बताया।
कथनी और करनी का अंतर: उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ दलों ने दशकों तक इस बिल को सिर्फ चुनावी मुद्दा बनाए रखा, लेकिन इसे पारित करने की इच्छाशक्ति नहीं दिखाई।
महिला नेतृत्व: पीएम ने जोर देकर कहा कि यह बिल केवल आरक्षण नहीं, बल्कि देश के विकास में महिलाओं की सीधी भागीदारी सुनिश्चित करने का माध्यम है।
विपक्ष की मांग: ‘अभी लागू हो आरक्षण‘
जहां एक तरफ पीएम मोदी ने बिल को गेम-चेंजर बताया, वहीं अखिलेश यादव और अन्य विपक्षी नेताओं ने मांग की कि इस आरक्षण को 2024 के लोकसभा चुनावों से ही लागू किया जाए। विपक्ष का तर्क है कि जनगणना और परिसीमन (Delimitation) की शर्त लगाकर सरकार इस प्रक्रिया को लंबा खींच रही है।
क्या है ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’?
इस बिल के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% सीटें आरक्षित करने का प्रावधान है। यदि यह कानून बनता है, तो संसद में महिलाओं की संख्या में भारी उछाल आएगा, जो वर्तमान में काफी कम है।
सदन में प्रधानमंत्री का अखिलेश यादव के प्रति नरम रुख और महिला आरक्षण पर कड़ा संदेश, दोनों ही आगामी चुनावों के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। अब देखना यह है कि यह बिल धरातल पर कितनी जल्दी उतरता है।




