खुद को जिंदा साबित करने के लिए दर-दर भटक रहा युवक, सरकारी रिकॉर्ड में ‘मृत’ घोषित होने से सेना भर्ती पर लगा ब्रेक

हरदोई | उत्तर प्रदेश के हरदोई जनपद से एक बेहद चौंकाने वाला और सिस्टम की गंभीर लापरवाही को उजागर करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक युवक खुद को जिंदा साबित करने के लिए वर्षों से सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर है, जबकि सरकारी रिकॉर्ड में उसे मृत घोषित कर दिया गया है। इस गंभीर गलती के कारण युवक का सेना में चयन होते-होते रुक गया और उसका भविष्य अधर में लटक गया है।
सरकारी कागजों में युवक मृत, हकीकत में जिंदा
मामला विकास खंड टड़ियावां के बौठा गांव निवासी राजीव कुमार सिंह से जुड़ा है। राजीव ने बताया कि वह लंबे समय से भारतीय सेना में भर्ती होने की तैयारी कर रहा था। वर्ष 2023 में भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद जब पुलिस और प्रशासनिक सत्यापन के लिए गांव स्तर पर दस्तावेज पहुंचे, तब चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि परिवार रजिस्टर में राजीव कुमार सिंह को मृतक दर्शाया गया है।
इस जानकारी के बाद न केवल सेना भर्ती प्रक्रिया रोक दी गई, बल्कि राजीव को पहली बार पता चला कि सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार वह जीवित नहीं है।
सेना भर्ती पर संकट, कई मौके हाथ से निकले
परिवार रजिस्टर में मृत दर्ज होने के कारण राजीव का चरित्र एवं सत्यापन पूरा नहीं हो सका, जिससे उसकी सेना भर्ती प्रक्रिया बीच में ही अटक गई। राजीव का कहना है कि इस गलती के चलते वह कई नौकरी के अवसर गंवा चुका है, जबकि उसकी कोई गलती नहीं है।
क्यों मृत दिखाया गया, किसी के पास जवाब नहीं
राजीव ने बताया कि परिवार रजिस्टर में तत्कालीन ग्राम सचिव द्वारा उसे मृत क्यों दर्शाया गया, इसकी कोई जानकारी उसे नहीं दी जा रही है। इस गंभीर प्रशासनिक चूक के लिए आज तक किसी भी अधिकारी ने जिम्मेदारी तय नहीं की।
अधिकारियों की चौखट पर गुहार, मिला सिर्फ आश्वासन
खुद को जिंदा साबित करने के लिए राजीव कई बार ब्लॉक कार्यालय, पंचायत स्तर और संबंधित अधिकारियों के पास गया, लेकिन हर बार उसे निराशा ही हाथ लगी। कहीं फाइल आगे नहीं बढ़ी और न ही परिवार रजिस्टर में सुधार किया गया।
जनसुनवाई पोर्टल पर भी अधूरी कार्रवाई
जब थक-हारकर राजीव ने मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई, तो जांच अधिकारियों ने आख्या लगाई कि
“गांव में खुली बैठक आयोजित कर निर्णय लिया जाएगा, जिसके बाद परिवार रजिस्टर में संशोधन किया जाएगा।”
हालांकि हैरानी की बात यह है कि इस खुली बैठक की तिथि तय नहीं की गई, न ही यह बताया गया कि बैठक कब होगी। इसी अनिश्चितता के चलते राजीव का भविष्य लगातार अधर में लटका हुआ है।
युवक का भविष्य दांव पर, सिस्टम की संवेदनहीनता उजागर
एक ओर सरकार युवाओं को सेना, पुलिस और अन्य सेवाओं में भर्ती के लिए प्रेरित कर रही है, वहीं दूसरी ओर सरकारी रिकॉर्ड की एक गलती ने एक होनहार युवक का सपना तोड़ दिया है। राजीव सिंह का कहना है कि यदि समय रहते रिकॉर्ड ठीक नहीं हुआ तो वह आगे किसी भी भर्ती में भाग नहीं ले पाएगा।
प्रशासन से न्याय की मांग
राजीव कुमार सिंह ने जिला प्रशासन और प्रदेश सरकार से मांग की है कि:
परिवार रजिस्टर में तत्काल सुधार किया जाए
दोषी अधिकारियों की जिम्मेदारी तय हो
युवक को हुए नुकसान की भरपाई पर विचार किया जाए
यह मामला सिर्फ एक युवक का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की कार्यशैली पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।




