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जांच का ‘नाटक’ या सिस्टम का खेल? लम्भुआ में डीपीआरओ के न पहुँचने पर भड़के फरियादी

लम्भुआ (सुल्तानपुर): भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस का दावा करने वाला प्रशासनिक अमला खुद सवालों के घेरे में है। जनपद के विकासखंड लम्भुआ की ग्राम पंचायत देवलपुर में विकास कार्यों की जांच का मामला मंगलवार को तमाशा बनकर रह गया। जिला पंचायत राज अधिकारी (DPRO) ने खुद नोटिस जारी कर जांच की तारीख तय की थी, लेकिन वे खुद ही मौके से नदारद रहे।

धूप में तपा फरियादी, ठंडी फाइलों में दबा न्याय

​शिकायतकर्ता राम भारत ने पंचायत सचिव अरविंद कुमार और ग्राम प्रधान ज्ञानमती पर विकास कार्यों में भारी वित्तीय अनियमितता और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। जिला पंचायत राज अधिकारी अभिषेक कुमार शुक्ला ने इस शिकायत का संज्ञान लेते हुए 21 अप्रैल 2026 की तिथि जांच के लिए निर्धारित की थी।

  • तैयारी: शिकायतकर्ता सुबह से ही साक्ष्यों और दस्तावेजों के साथ पंचायत भवन पर डटे रहे।
  • हकीकत: घंटों इंतजार के बाद भी न तो डीपीआरओ पहुंचे और न ही उनकी कोई टीम।
  • परिणाम: चिलचिलाती धूप में घंटों खड़ा रहने के बाद फरियादी को खाली हाथ वापस लौटना पड़ा।

प्रशासनिक कार्यशैली पर उठते गंभीर सवाल

​ग्राम पंचायत में हुए कार्यों का लेखा-जोखा और वित्तीय रिकॉर्ड जांच के लिए तैयार तो थे, लेकिन जांच अधिकारी की अनुपस्थिति ने कई संदेह पैदा कर दिए हैं।

​”जब जांच का समय और तारीख विभाग खुद तय करता है, तो फिर अधिकारी गायब क्यों हो जाते हैं? क्या गरीब की शिकायत की कोई अहमियत नहीं है या फिर जानबूझकर दोषियों को संरक्षण दिया जा रहा है?”

राम भारत, शिकायतकर्ता

 

क्या है भ्रष्टाचार का मामला?

​शिकायत के अनुसार, देवलपुर ग्राम पंचायत में कराए गए निर्माण कार्यों और अन्य सरकारी योजनाओं के बजट में धांधली की गई है। सचिव और प्रधान की कार्यप्रणाली पर उंगली उठाते हुए राम भारत ने उच्चाधिकारियों से निष्पक्ष जांच की मांग की थी।

निष्कर्ष: जवाबदेही किसकी?

​इस घटनाक्रम ने जिले के पंचायती राज विभाग की साख पर बट्टा लगा दिया है। अब क्षेत्र में चर्चा का बाजार गर्म है कि क्या यह महज एक लापरवाही है या फिर रसूखदारों को बचाने के लिए जांच को ठंडे बस्ते में डालने की साजिश?

​जनता अब जिलाधिकारी से यह सवाल पूछ रही है कि नोटिस जारी कर खुद गायब रहने वाले अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होगी? क्या देवलपुर के भ्रष्टाचार की फाइल कभी खुलेगी या फिर साठगांठ के अंधेरे में दम तोड़ देगी?

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