ई-पंजीकरण के विरोध में सुल्तानपुर समेत पूरे UP में कामकाज ठप, जानें कब समाप्त होगी हड़ताल

प्रमुख सुर्खियां (Headlines):
- सुल्तानपुर की तहसीलों में सन्नाटा: ई-रजिस्ट्री और पीपीपी मॉडल के खिलाफ दस्तावेज लेखकों का अनिश्चितकालीन धरना
- रोजगार पर संकट: निजीकरण की नीतियों के विरोध में लामबंद हुए बैनामा लेखक और अधिवक्ता
- आम जनता परेशान, सरकार को रोजाना लाखों के राजस्व का नुकसान; उप-निबंधकों की अपील बेअसर
सुल्तानपुर/ उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा निबंधन विभाग में लागू की जा रही नई ई-पंजीकरण (E-Registration) व्यवस्था के विरोध में सुल्तानपुर जिले समेत पूरे प्रदेश में बैनामा लेखकों और अधिवक्ताओं का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। ‘उत्तर प्रदेश दस्तावेज लेखक एसोसिएशन’ के आह्वान पर सुल्तानपुर की सदर, जयसिंहपुर (गोसाईगंज) और कादीपुर जैसी प्रमुख तहसीलों में दस्तावेज लेखक पूरी तरह हड़ताल पर हैं, जिससे निबंधक कार्यालयों में कामकाज पूरी तरह ठप हो गया है।
तहसील परिसरों में धरने पर बैठे पदाधिकारियों का आरोप है कि सरकार इस व्यवस्था को निजी हाथों (पीपीपी मॉडल) में सौंपने की तैयारी कर रही है। दस्तावेज लेखकों का कहना है कि ४ जून को जारी शासनादेश के बाद यदि ई-रजिस्ट्री पूरी तरह लागू होती है, तो दस्तावेज लेखक, स्टांप वेंडर, कंप्यूटर ऑपरेटर और फोटोकॉपी करने वालों के सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा। जयसिंहपुर और गोसाईगंज में उप-निबंधक (रजिस्ट्रार) आदित्य जायसवाल द्वारा लेखकों से हड़ताल वापस लेने के अनुरोध के बावजूद आंदोलनकारी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं और सरकार को संबोधित ज्ञापन सौंप रहे हैं।
कब समाप्त होगी हड़ताल? (स्थिति और शासन का रुख)
हड़ताल कब समाप्त होगी, इसे लेकर वर्तमान स्थिति इस प्रकार है:
१. शासन की ओर से आई बड़ी स्पष्टीकरण (भ्रांति दूर करने की कोशिश):
बढ़ते विरोध को देखते हुए शासन स्तर और महानिरीक्षक निबंधन विभाग की ओर से स्पष्टीकरण जारी किया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, यह ई-पंजीकरण व्यवस्था आम जनता के आपसी (प्राइवेट) जमीन-मकान के बैनामों पर लागू नहीं होगी। यह सिर्फ विकास प्राधिकरणों (जैसे LDA, PDA), आवास विकास और यूपीसीडा (UPSIDA) के तहत होने वाले पहले बैनामे (First Transfer Deeds) के लिए अनिवार्य की जा रही है। आम जनता के सामान्य बैनामे पहले की तरह ही तहसील स्तर पर पुरानी व्यवस्था से ही होंगे।
२. लेखकों और वकीलों का रुख:
शासन के इस स्पष्टीकरण के बावजूद दस्तावेज लेखक संगठन पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं। उनका मानना है कि सरकार धीरे-धीरे इस व्यवस्था को सभी प्रकार की रजिस्ट्री पर लागू कर देगी, जिससे तहसील स्तर का ढांचा खत्म हो जाएगा। कई जिलों (जैसे एटा) में संगठनों ने शुरुआती तौर पर २१ जून तक हड़ताल की घोषणा की है, जबकि सुल्तानपुर समेत कई जगहों पर इसे मांगें पूरी होने तक अनिश्चितकालीन रखने की चेतावनी दी गई है।
निष्कर्ष: फिलहाल सरकार और एसोसिएशन के बीच कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ है। उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले १-२ दिनों में प्रांतीय पदाधिकारियों और शासन के उच्च अधिकारियों के बीच होने वाली वार्ता के बाद ही इस हड़ताल की समाप्ति पर कोई अंतिम निर्णय हो सकेगा। तब तक रजिस्ट्री से जुड़े कार्यों के लिए आम जनता को अभी और इंतजार करना पड़ सकता है।



