राम मंदिर दान गबन विवाद: SIT ने 9 पेन ड्राइव में जुटाए अहम डिजिटल सबूत, जांच में संदिग्ध ‘गणना प्रभारी’ का नाम आया सामने

अयोध्या के भव्य राम मंदिर में दान और चढ़ावे की चोरी (गबन) के आरोपों की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की कार्रवाई अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गठित तीन सदस्यीय एसआईटी ने मामले की प्रारंभिक रिपोर्ट लगभग तैयार कर ली है। दावा किया जा रहा है कि एसआईटी ने सीसीटीवी फुटेज, वित्तीय रिकॉर्ड और अन्य अहम डिजिटल सबूतों को 9 पेन ड्राइव में सुरक्षित कर लिया है।
इस पूरे प्रकरण की परतें खुलने के साथ ही दो लोगों की भूमिका सबसे खास मानी जा रही है, जिनमें से एक ‘गणना प्रभारी’ (Counting Supervisor/In-charge) है। जांच की सुई अब सीधे तौर पर इन्हीं की तरफ घूम रही है।
आइए जानते हैं कि आखिर ये गणना प्रभारी कौन हैं और एसआईटी जांच में अब तक क्या-क्या अहम खुलासे हुए हैं:
कौन हैं वो ‘गणना प्रभारी’ और क्या है उनकी संदिग्ध भूमिका?
शुक्रवार को जब एसआईटी ने ग्रीन हाउस के अलग-अलग कमरों में संदिग्ध कर्मचारियों से पूछताछ की, तो बार-बार दो नाम सामने आए। इनमें से सबसे प्रमुख नाम ‘गणना प्रभारी’ का था।
इन 3 कारणों से कस रहा है शिकंजा:
-
सीसीटीवी की निगरानी में सेंध: सूत्रों का दावा है कि राम मंदिर के पुलिस कंट्रोल रूम से सीसीटीवी कैमरों की निगरानी को अलग करने (या उसका एक्सेस सीमित करने) में इस गणना प्रभारी की अहम भूमिका रही है। आशंका जताई जा रही है कि इसी दौरान दान पात्रों के पैसों में हेरफेर किया गया और सबूत मिटाए गए।
-
बिना चेकिंग के एंट्री: आरोप है कि दान की गणना (गिनती) स्थल पर आने-जाने के दौरान, बैंक कर्मियों और अन्य स्टाफ को सुरक्षा चेकिंग से मुक्त रखने में भी इसी प्रभारी ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल किया।
-
नियुक्तियों में दखल: पूछताछ में यह भी सामने आया है कि संगठन के एक कार्यकर्ता के रूप में, इस गणना प्रभारी ने ही दान की गिनती करने वाले कई कर्मियों की नियुक्ति करवाई थी।
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के करीबी और मंदिर के सेवादार रामशंकर यादव (उर्फ टिन्नू) ने भी इस गणना प्रभारी की भूमिका पर सबसे पहले गंभीर सवाल उठाए थे।
SIT जांच की 4 बड़ी बातें
-
9 पेन ड्राइव में कैद हुए सबूत: एसआईटी ने मंदिर परिसर के सीसीटीवी फुटेज, बैंक स्टेटमेंट और पैसों की गिनती करने वाली एजेंसी के रिकॉर्ड को खंगाला है। इन सभी डिजिटल सबूतों और दस्तावेजों को 9 पेन ड्राइव में संकलित कर मुख्यमंत्री कार्यालय भेजने की तैयारी है।
-
लंबी पूछताछ का दौर: एसआईटी (जिसमें लखनऊ के कमिश्नर विजय विश्वास पंत, आईजी किरन एस. और वित्त विभाग के विशेष सचिव नीलरतन शामिल हैं) ने मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों, बैंक कर्मियों और सेवादारों सहित करीब 42 लोगों से पूछताछ की है।
-
5 प्रमुख संदिग्धों के नाम आए सामने: अब तक की जांच में चढ़ावा चोरी मामले में मुख्य रूप से पांच लोगों के नाम सामने आए हैं— लवकुश, अवनीश, अनुकल्प, करुणी और रामशंकर (उर्फ टिन्नू)।
-
बड़ी रिकवरी का दावा: मीडिया रिपोर्ट्स और सूत्रों के अनुसार, इन संदिग्धों से पूछताछ के आधार पर अब तक करीब ₹1 करोड़ की रिकवरी भी की जा चुकी है। यह सभी लोग दान राशि की गिनती की ड्यूटी से जुड़े हुए थे।
सुनियोजित षड्यंत्र या मौके का फायदा?
एसआईटी अब अपनी जांच इस बिंदु पर केंद्रित कर रही है कि क्या राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी किसी बड़े और संगठित अपराध (Organized Crime) का हिस्सा थी, जिसकी योजना पहले से बनाई गई थी? या फिर सुरक्षा खामियों का फायदा उठाकर मौका मिलते ही इस गबन को अंजाम दिया गया।
फिलहाल, प्रारंभिक रिपोर्ट के फैक्ट्स मुख्यमंत्री कार्यालय को सौंपे जा रहे हैं और माना जा रहा है कि ‘गणना प्रभारी’ सहित अन्य जिम्मेदार लोगों पर जल्द ही बड़ी कानूनी कार्रवाई देखने को मिल सकती है।




