मिशन 2027? अखिलेश यादव ने बदला गेम, भाजपा के खिलाफ ‘सनातन’ कार्ड से किया पलटवार।

“भाजपा हटाओ, सनातन बचाओ”: अखिलेश यादव का बीजेपी पर तीखा हमला
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए एक नया और विवादित नारा दिया है: “भाजपा हटाओ, सनातन बचाओ”।
अखिलेश यादव ने भाजपा पर धर्म का राजनीतिकरण करने और वास्तविक आध्यात्मिक परंपराओं को नुकसान पहुँचाने का गंभीर आरोप लगाया है।
सच्चे संतों के अपमान का आरोप
सपा प्रमुख ने कहा कि भाजपा खुद को धर्म का रक्षक बताती है, लेकिन असलियत में वह अपनी सुविधा के अनुसार धर्म का उपयोग करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि:
संतों का निरादर: भाजपा सरकार में उन ‘सच्चे संतों’ का अपमान किया जा रहा है जो सत्ता की हां में हां नहीं मिलाते।
राजनीतिक लाभ: धर्म को केवल वोटों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे वास्तविक सनातन परंपराओं की पवित्रता कम हो रही है।
विरोधियों को डराने की राजनीति
अखिलेश यादव ने सरकार पर दमनकारी नीतियों का आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा लोकतंत्र की मर्यादा भूल चुकी है। उनके संबोधन के मुख्य बिंदु रहे:
झूठे मुकदमे: उन्होंने कहा कि जो भी भाजपा की नीतियों के खिलाफ आवाज उठाता है, उसे झूठे मामलों और कानूनी पचड़ों में फंसाकर डराने की कोशिश की जाती है।
दबाने की रणनीति: विपक्षी नेताओं और सरकार से असहमत लोगों को केंद्रीय एजेंसियों और पुलिस के दम पर दबाने का प्रयास किया जा रहा है।
सियासी गलियारों में हलचल
अखिलेश यादव का यह नारा “भाजपा हटाओ, सनातन बचाओ” सीधे तौर पर भाजपा के हिंदुत्व के एजेंडे को चुनौती देने की कोशिश मानी जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि:
काउंटर नैरेटिव: सपा अब ‘हिंदू विरोधी’ होने के ठप्पे को हटाकर खुद को ‘सच्चे सनातन’ के रक्षक के रूप में पेश करना चाहती है।
चुनाव की तैयारी: आगामी चुनावों को देखते हुए विपक्षी दल अब भाजपा के सबसे मजबूत गढ़ यानी ‘धर्म और आस्था’ पर ही प्रहार कर रहे हैं।
भाजपा की प्रतिक्रिया:
हालांकि भाजपा की ओर से अभी आधिकारिक जवाब आना बाकी है, लेकिन पार्टी के प्रवक्ताओं ने इसे “चुनावी स्टंट” और “तुष्टिकरण की राजनीति का नया रूप” करार दिया है।




