ऐतिहासिक फैसला: सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 34 से बढ़कर हुई 38, सरकार लाएगी संशोधन बिल

सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने को कैबिनेट की मंजूरी, अब 38 होगी कुल संख्या
नई दिल्ली | केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंगलवार (5 मई, 2026) को एक महत्वपूर्ण फैसले में सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस निर्णय के बाद सुप्रीम कोर्ट में जजों की कुल स्वीकृत संख्या 34 से बढ़कर 38 हो जाएगी।
प्रमुख बिंदु
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न्यायाधीशों की नई संख्या: अब सुप्रीम कोर्ट में जजों की कुल संख्या (मुख्य न्यायाधीश सहित) 34 से बढ़कर 38 (37 अन्य न्यायाधीश और 1 भारत के मुख्य न्यायाधीश) हो जाएगी।
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विधेयक (Amendment Bill): इस बदलाव को लागू करने के लिए सरकार संसद के आगामी सत्र में ‘सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026’ पेश करेगी।
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संवैधानिक प्रावधान: संविधान के अनुच्छेद 124(1) के तहत, सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या का निर्धारण करने का अधिकार केवल संसद के पास है।
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घोषणाकर्ता: केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट की बैठक के बाद इस फैसले की जानकारी दी और बताया कि इसका मुख्य उद्देश्य मुकदमों के बढ़ते बोझ को कम करना है।
पृष्ठभूमि और जजों की संख्या का इतिहास
जब वर्ष 1950 में सुप्रीम कोर्ट की स्थापना हुई थी, तब इसमें मुख्य न्यायाधीश सहित केवल 8 जज थे। देश की बढ़ती आबादी और मुकदमों के बोझ को देखते हुए समय-समय पर इसमें वृद्धि की गई है:
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1956: 11
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1960: 14
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1986: 26 (25 अन्य जज और 1 CJI)
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2009: 31 (30 अन्य जज और 1 CJI)
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2019: 34 (33 अन्य जज और 1 CJI – 6 साल पहले हुआ था अंतिम संशोधन)
फैसले का कारण और प्रभाव
वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में 92,000 से अधिक मामले लंबित हैं। महामारी के बाद ई-फाइलिंग की सुविधा बढ़ने से मामलों के आने की दर में तेजी आई है।
सरकार का मानना है कि अतिरिक्त जजों के शामिल होने से:
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मामलों के त्वरित निपटारे में मदद मिलेगी।
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संविधान पीठों के गठन में आसानी होगी।
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कार्यकुशलता में वृद्धि होगी।
नए जजों और उनके सहयोगी स्टाफ के वेतन व भत्ते का खर्च ‘भारत की संचित निधि’ (Consolidated Fund of India) से वहन किया जाएगा। विधेयक के संसद के दोनों सदनों से पारित होने और राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद यह संशोधन प्रभावी हो जाएगा।




