क्या राज्यपाल कर सकते हैं बर्खास्त? जानिए मुख्यमंत्री के इस्तीफा न देने पर संविधान का अनुच्छेद 164 क्या कहता है

ममता बनर्जी का इस्तीफा देने से इनकार, अब राज्यपाल के पास क्या हैं विकल्प?
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों के बाद राज्य में एक नया राजनीतिक और संवैधानिक विवाद खड़ा हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 294 सदस्यीय विधानसभा में 207 सीटों का स्पष्ट बहुमत हासिल किया है, जबकि तृणमूल कांग्रेस (TMC) को 80 सीटें मिली हैं। इस हार के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस्तीफा देने से साफ इनकार कर दिया है।
ममता बनर्जी का रुख और आरोप
कोलकाता में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि उनके इस्तीफे का सवाल ही नहीं उठता क्योंकि उन्होंने यह चुनाव नहीं हारा है। उन्होंने चुनाव आयोग (EC) पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया कि नतीजे “जनादेश नहीं बल्कि एक साजिश” का परिणाम हैं। गौरतलब है कि इस चुनाव में ममता बनर्जी को भवानीपुर सीट पर सुवेंदु अधिकारी के हाथों हार का सामना करना पड़ा है।
संवैधानिक और कानूनी पहलू
17वीं पश्चिम बंगाल विधानसभा और मौजूदा ममता बनर्जी सरकार का कार्यकाल 7 मई, 2026 को पूरा हो रहा है।
संविधान विशेषज्ञों के अनुसार, भले ही मुख्यमंत्री इस्तीफा न दें, लेकिन कार्यकाल पूरा होने के बाद उन्हें पद छोड़ना होगा। संविधान के अनुच्छेद 164 के तहत, मुख्यमंत्री और अन्य मंत्री राज्यपाल के प्रसादपर्यंत (pleasure of the Governor) ही अपने पद पर बने रहते हैं।
राज्यपाल के पास उपलब्ध विकल्प
यदि ममता बनर्जी पद छोड़ने से इनकार करती हैं, तो राज्यपाल के पास निम्नलिखित संवैधानिक और कानूनी विकल्प मौजूद हैं:
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1. बर्खास्तगी का अधिकार (Dismissal): संविधान के प्रावधानों के अनुसार, यदि कोई मुख्यमंत्री पद छोड़ने से मना करता है और नई सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू हो जाती है, तो राज्यपाल के पास उन्हें बर्खास्त करने का अधिकार है।
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2. नई सरकार के गठन का न्योता: राज्यपाल के पास बहुमत वाली पार्टी (BJP) को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करने का पूरा अधिकार और कर्तव्य है। 207 सीटों के प्रचंड बहुमत के साथ, भाजपा के नेता नई सरकार बनाने का दावा पेश कर सकते हैं।
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3. शपथ ग्रहण की प्रक्रिया (9 मई): पश्चिम बंगाल बीजेपी ने नई सरकार के शपथ ग्रहण के लिए 9 मई, 2026 (रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती) का दिन तय किया है। 7 मई को निवर्तमान विधानसभा का कार्यकाल समाप्त होते ही पुरानी सरकार का अस्तित्व तकनीकी रूप से समाप्त हो जाएगा।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
कानूनी विशेषज्ञों और विपक्षी नेताओं का मानना है कि ममता बनर्जी का यह रुख केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित है, क्योंकि नई विधानसभा के गठन और नए मुख्यमंत्री के शपथ लेते ही पुरानी सरकार का कार्यकाल समाप्त हो जाएगा।
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BJP का रुख: पार्टी का कहना है कि ममता बनर्जी जनादेश का अनादर कर रही हैं, लेकिन संवैधानिक प्रक्रिया के अनुसार 9 मई को नई सरकार का शपथ ग्रहण तय समय पर होगा।
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TMC का रुख: पार्टी का कहना है कि वे इस लड़ाई को सड़क पर लड़ेंगे और चुनाव नतीजों के खिलाफ अपनी आवाज उठाते रहेंगे।



