पॉक्सो कोर्ट का कड़ा रुख: ‘गुरु सेवा’ के नाम पर बच्चों के शोषण मामले में शंकराचार्य और उनके शिष्य पर केस दर्ज

प्रयागराज की एक विशेष पॉक्सो (POCSO) कोर्ट ने ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ बच्चों के यौन शोषण के आरोपों में FIR दर्ज करने का आदेश दिया है। इस मामले ने संत समाज और उत्तर प्रदेश की राजनीति में हड़कंप मचा दिया है।
प्रयागराज: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर POCSO एक्ट के तहत केस का आदेश
1. क्या है पूरा मामला?
शाकुंभरी पीठाधीश्वर और श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट के अध्यक्ष आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य मुकुंदानंद गिरी के खिलाफ कोर्ट में अर्जी दाखिल की थी।
आरोप: शिकायतकर्ता का दावा है कि प्रयागराज माघ मेले के दौरान उनके पास दो बच्चे (एक नाबालिग और एक अब बालिग, जो घटना के समय नाबालिग था) आए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि आश्रम में ‘गुरु सेवा’ के नाम पर बच्चों का यौन शोषण (कुकर्म) किया गया।
दबाव का दावा: आरोप है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्य बच्चों पर यह कहकर संबंध बनाने का दबाव डालते थे कि इससे उन्हें “गुरु का आशीर्वाद” मिलेगा।
2. कोर्ट का सख्त रुखप्रयागराज की एक विशेष पॉक्सो (POCSO) कोर्ट ने ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ बच्चों के यौन शोषण के आरोपों में FIR दर्ज करने का आदेश दिया है। इस मामले ने संत समाज और उत्तर प्रदेश की राजनीति में हड़कंप मचा दिया है।
यहाँ इस पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट दी गई है:
प्रयागराज: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर POCSO एक्ट के तहत केस का आदेश
1. क्या है पूरा मामला?
शाकुंभरी पीठाधीश्वर और श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट के अध्यक्ष आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य मुकुंदानंद गिरी के खिलाफ कोर्ट में अर्जी दाखिल की थी।
आरोप: शिकायतकर्ता का दावा है कि प्रयागराज माघ मेले के दौरान उनके पास दो बच्चे (एक नाबालिग और एक अब बालिग, जो घटना के समय नाबालिग था) आए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि आश्रम में ‘गुरु सेवा’ के नाम पर बच्चों का यौन शोषण (कुकर्म) किया गया।
दबाव का दावा: आरोप है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्य बच्चों पर यह कहकर संबंध बनाने का दबाव डालते थे कि इससे उन्हें “गुरु का आशीर्वाद” मिलेगा।
2. कोर्ट का सख्त रुख
प्रयागराज की स्पेशल पॉक्सो कोर्ट के जज विनोद कुमार चौरसिया ने इस मामले की सुनवाई की।
बयान दर्ज: 13 फरवरी 2026 को पीड़ितों के बयान कैमरे के सामने (वीडियोग्राफी के साथ) दर्ज किए गए थे।
पुलिस रिपोर्ट: कोर्ट ने पुलिस कमिश्नर की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट और पीड़ितों के बयानों को संज्ञान में लेते हुए झूंसी थाने को तत्काल FIR दर्ज कर निष्पक्ष जांच करने का आदेश दिया।
3. शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की प्रतिक्रिया
शंकराचार्य ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे एक गहरी साजिश बताया है। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा:
हिस्ट्रीशीटर का आरोप: “मुकदमा करने वाला (आशुतोष ब्रह्मचारी) खुद एक हिस्ट्रीशीटर है। उसका रिकॉर्ड शामली जिले के कांधला थाने में दर्ज है। वह लोगों पर फर्जी केस करके धन उगाही करने के लिए जाना जाता है।”
साजिश का दावा: उन्होंने आरोप लगाया कि यह मामला जगद्गुरु रामभद्राचार्य के इशारे पर उनके चेले द्वारा करवाया गया है। उन्होंने कहा कि गोमाता की रक्षा और अन्य धार्मिक मुद्दों पर उनके स्टैंड के कारण उन्हें दबाने की कोशिश की जा रही है।
जांच का स्वागत: उन्होंने कहा, “न्यायालय की प्रक्रिया का हम सहयोग करेंगे। दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।”
4. आशुतोष महाराज की खुली चुनौती
शिकायतकर्ता आशुतोष महाराज ने शंकराचार्य को चुनौती दी है कि वे सरकारी मेडिकल कॉलेज में अपना पोटेंसी टेस्ट (मेडिकल टेस्ट) करवाएं। उन्होंने दावा किया कि उनके पास इस मामले से जुड़े कई सबूत और स्टिंग ऑपरेशन के वीडियो हैं जो वे पुलिस को सौंपेंगे।
मामले की वर्तमान स्थिति
FIR का आदेश: कोर्ट ने झूंसी पुलिस को निर्देश दिया है कि पॉक्सो एक्ट और BNS की सुसंगत धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच रिपोर्ट पेश की जाए।
विवाद की पृष्ठभूमि: गौरतलब है कि हाल ही में माघ मेले के दौरान संगम स्नान को लेकर शंकराचार्य और प्रशासन के बीच काफी विवाद हुआ था, जिसके बाद यह नया मामला सामने आया है।




