राज्यसभा में बड़ा उलटफेर: AAP के 7 सांसदों का भाजपा में विलय, सभापति ने दी मंजूरी

नई दिल्ली | देश की राजनीति में सोमवार को उस समय बड़ा भूचाल आ गया जब राज्यसभा सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने आम आदमी पार्टी (AAP) के 10 में से 7 सांसदों के भारतीय जनता पार्टी (BJP) में विलय के प्रस्ताव को औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया। इस फैसले के साथ ही उच्च सदन में भाजपा की व्यक्तिगत सदस्य संख्या बढ़कर 113 हो गई है, जबकि आम आदमी पार्टी की ताकत घटकर मात्र 3 रह गई है।
इन बड़े चेहरों ने बदला पाला
भाजपा में शामिल होने वाले सांसदों के समूह का नेतृत्व राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल ने किया। इनके अलावा इस समूह में निम्नलिखित दिग्गज शामिल हैं:
- हरभजन सिंह (पूर्व क्रिकेटर)
- स्वाति मालीवाल (पूर्व DCW अध्यक्ष)
- विक्रमजीत सिंह साहनी
- राजिंदर गुप्ता
कानूनी पेच और ‘दो-तिहाई’ का गणित
संविधान की दसवीं अनुसूची (दलबदल विरोधी कानून) के अनुसार, यदि किसी दल के कम से कम दो-तिहाई (2/3) निर्वाचित सदस्य दूसरे दल में विलय करते हैं, तो उनकी सदस्यता रद्द नहीं होती। चूंकि AAP के कुल 10 सांसदों में से 7 ने पाला बदला है (जो 70% है), इसलिए तकनीकी रूप से उनकी सदस्यता पर तत्काल कोई खतरा नजर नहीं आ रहा है।
प्रमुख प्रतिक्रियाएं
- भाजपा: संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इस कदम का स्वागत करते हुए इसे ‘राष्ट्र निर्माण’ के लिए उठाया गया कदम बताया।
- आम आदमी पार्टी: आप नेता संजय सिंह ने इसे “संवैधानिक धोखाधड़ी” करार दिया है। पार्टी ने राज्यसभा सभापति के समक्ष इन सांसदों को अयोग्य घोषित करने की याचिका दायर की है और स्पष्ट किया है कि वे इस “एकतरफा फैसले” के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं।
- राघव चड्ढा: उन्होंने एक वीडियो संदेश में आरोप लगाया कि पार्टी के भीतर का माहौल “विषाक्त” (toxic) हो गया था और नेतृत्व कुछ स्वार्थी लोगों के हाथों में सिमट गया था।
सदन के समीकरण पर असर
इस विलय के बाद राज्यसभा में एनडीए (NDA) का कुल आंकड़ा 148 तक पहुँच गया है (मनोनीत सदस्यों सहित)। भाजपा अब सदन में दो-तिहाई बहुमत के जादुई आंकड़े (163) के और करीब पहुँच गई है, जिससे सरकार के लिए महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराना अब और आसान हो जाएगा।
ब्यूरो रिपोर्ट: हाई-टेक पॉइंट न्यूज




