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संसद में हाई वोल्टेज ड्रामा: 28 वोटों की कमी से गिरा महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन बिल

लोकसभा में आज एक ऐतिहासिक और गहमागहमी वाला घटनाक्रम देखने को मिला, जहाँ केंद्र सरकार द्वारा पेश किया गया 131वां संविधान संशोधन विधेयक गिर गया। सदन में 21 घंटे की लंबी बहस के बाद हुई वोटिंग में सरकार आवश्यक दो-तिहाई बहुमत जुटाने में विफल रही।

संसद में बड़ा उलटफेर: लोकसभा में गिरा 131वां संविधान संशोधन बिल, 28 वोटों से चूकी सरकार

नई दिल्ली: मोदी सरकार के 11 साल के कार्यकाल में यह पहली बार है जब कोई महत्वपूर्ण संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा में पारित नहीं हो पाया। महिला आरक्षण को लागू करने और लोकसभा की सीटें बढ़ाने से जुड़े 131वें संविधान संशोधन विधेयक, 2026 को सदन ने खारिज कर दिया। बिल के गिरते ही विपक्षी खेमे में भारी उत्साह देखा गया, वहीं सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह महिलाओं के हक के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेगी।

वोटिंग का गणित: क्यों गिरा बिल?

संविधान संशोधन के लिए सदन में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों का दो-तिहाई (2/3) बहुमत अनिवार्य होता है।

कुल मतदान: 489 सांसदों ने वोट डाले।

पक्ष में वोट: 298

विपक्ष में वोट: 230

जरूरी आंकड़ा: बिल पास करने के लिए 326 वोटों की जरूरत थी, लेकिन सरकार केवल 298 वोट ही जुटा पाई। इस तरह यह बिल 28 वोटों के अंतर से गिर गया।

क्या था इस बिल का उद्देश्य?

इस विधेयक का मुख्य लक्ष्य ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ (महिला आरक्षण) को जल्द से जल्द जमीन पर उतारना था। इसके मुख्य बिंदु थे:

1. सीटों में बढ़ोतरी: लोकसभा की सीटों को मौजूदा 543 से बढ़ाकर 850 करना।

2. परिसीमन (Delimitation): 2011 की जनगणना के आधार पर नया परिसीमन करना ताकि 2029 के चुनावों से पहले महिलाओं को 33% आरक्षण दिया जा सके।

3. उत्तर-दक्षिण विवाद: विपक्ष का आरोप था कि परिसीमन के बहाने दक्षिण भारतीय राज्यों की तुलना में उत्तर भारतीय राज्यों की सीटें ज्यादा बढ़ेंगी, जिससे क्षेत्रीय असंतुलन पैदा होगा।

सरकार का रुख: “महिलाओं को अधिकार दिलाकर रहेंगे”

बिल गिरने के बाद संसदीय कार्य राज्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सदन में घोषणा की कि सरकार अब इस मुद्दे से जुड़े अन्य दो बिलों (परिसीमन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून संशोधन) पर चर्चा आगे नहीं बढ़ाएगी क्योंकि ये तीनों आपस में जुड़े थे। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि विपक्ष ने बाधा डाली, लेकिन सरकार महिलाओं को उनका अधिकार दिलाकर ही रहेगी।”

गृह मंत्री अमित शाह ने भी विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि देश की महिलाएं देख रही हैं कि उनके आरक्षण के रास्ते में रोड़ा कौन बन रहा है।

विपक्ष की प्रतिक्रिया: “संविधान पर हमले को रोका”

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इसे लोकतंत्र की जीत बताया। उन्होंने कहा, “यह बिल महिला आरक्षण के बारे में नहीं था, बल्कि देश के चुनावी ढांचे और संविधान पर आक्रमण था। हमने इसे रोक दिया है।” विपक्ष का मुख्य विरोध परिसीमन और जनगणना की शर्तों को लेकर था।

अगले कदम:

सदन की कार्यवाही शनिवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई है। इस बिल के गिरने के बाद अब 2029 के चुनावों में महिला आरक्षण के लागू होने की समयसीमा पर सवालिया निशान लग गया है।

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