शिवसेना स्थापना दिवस: ‘कुत्ते झुंड में भौंकते हैं, शेर अकेला चलता है…’— ऑपरेशन टाइगर और उद्धव-राउत पर बरसे सीएम एकनाथ शिंदे

मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में ‘ऑपरेशन टाइगर’ और दलबदल की जारी अटकलों के बीच, शिवसेना के 60वें स्थापना दिवस पर सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। मुंबई के नेस्को सेंटर (Goregaon) में आयोजित शिवसेना की भव्य रैली को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे नीत शिवसेना (UBT) और महाविकास अघाड़ी (MVA) पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला।
उद्धव ठाकरे और संजय राउत का नाम लिए बिना शिंदे ने बेहद आक्रामक अंदाज में कहा कि बाघ की खाल ओढ़ लेने से कोई भेड़िया बाघ नहीं बन जाता। उन्होंने साफ संकेत दिए कि आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की राजनीति में बहुत बड़ा उलटफेर होने वाला है और जो कुछ अब तक दिखा है, वह “सिर्फ एक ट्रेलर है, असली फिल्म अभी आनी बाकी है।”
‘कुत्ते झुंड में भौंकते हैं, टाइगर शिकार करता है’
विपक्षी नेताओं द्वारा लगातार किए जा रहे हमलों और चेतावनियों पर पलटवार करते हुए एकनाथ शिंदे ने गरजते हुए कहा:
“पिछले कुछ दिनों से लोग कयास लगा रहे थे कि स्थापना दिवस के मंच पर कौन होगा और शिंदे क्या बोलेंगे? आज देखो, यह शेर आपके ठीक सामने खड़ा है। कुछ कुत्ते रोज भौंकते हैं, लेकिन याद रखो— कुत्ते हमेशा झुंड में भौंकते हैं, जबकि शेर अकेला चलता है। कुत्ते भौंकते रहते हैं और टाइगर दहाड़ता है, शिकार करता है।”
संजय राउत को बताया ‘कंपाउंडर’, बेटे श्रीकांत को ‘असली डॉक्टर’
शिवसेना (UBT) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने हाल ही में ‘ऑपरेशन तुड़वा’ की धमकी देते हुए कहा था कि अगर बागी विधायक अपने क्षेत्रों में आए तो शिवसैनिक उन्हें कुचल देंगे। इस पर तंज कसते हुए शिंदे ने राउत के राजनीतिक कद का मजाक उड़ाया:
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कंपाउंडर बनाम डॉक्टर: शिंदे ने कहा, “कुछ लोग दावा कर रहे थे कि वे भेड़ियों का ऑपरेशन करेंगे, लेकिन वह तो खुद बस एक ‘कंपाउंडर’ हैं। भला एक कंपाउंडर क्या ऑपरेशन करेगा? यहां मेरा बेटा श्रीकांत शिंदे ही असली डॉक्टर है। भले ही मैं डॉक्टर नहीं हूं, लेकिन मुझे राजनीति का बड़ा ऑपरेशन करना अच्छे से आता है।”
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जिगर की बात: उन्होंने आगे कहा कि किसी भी बड़े ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए ‘शेर जैसा दिल’ चाहिए होता है, भेड़िये जैसा कमजोर दिल नहीं। उद्धव ठाकरे पर सीधा निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि सिर्फ बाघ की खाल पहन लेने से कोई भेड़िया सच में बाघ नहीं बन जाता।
राहुल गांधी पर निशाना: ‘न खुद जीतेंगे, न किसी को जीतने देंगे’
रैली के दौरान एकनाथ शिंदे ने केवल क्षेत्रीय विरोधियों को ही नहीं, बल्कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी को भी आड़े हाथों लिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रसिद्ध नारे ‘न खाऊंगा, न खाने दूंगा’ की तर्ज पर विपक्ष की मानसिकता को उजागर करते हुए शिंदे ने कहा:
“देश में विपक्ष का एक ही रवैया है, खासकर राहुल गांधी का— ‘न खुद जीतेंगे और न किसी को जीतने देंगे।’ राहुल गांधी जहां भी जाते हैं, वहां सिर्फ हार ही हाथ लगती है।”
2022 की बगावत को किया याद: ‘घरों में बैठकर मुझे ऑनलाइन देख रहे थे’
जून 2022 में महाविकास अघाड़ी सरकार के खिलाफ की गई अपनी ऐतिहासिक बगावत का जिक्र करते हुए शिंदे भावुक भी हुए और हमलावर भी। उन्होंने कहा:
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जागीर नहीं है मुंबई: “जब मैं बगावत के बाद मुंबई लौटा, तो इन्हीं नेताओं ने मुझे धमकी दी थी कि मुझे वर्ली (आदित्य ठाकरे का निर्वाचन क्षेत्र) होकर आना पड़ेगा। मुंबई किसी की निजी जागीर नहीं है। मैं बिना किसी हेलीकॉप्टर के, सड़क मार्ग से अकेला आया और वर्ली में रुका भी।”
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कट्टर विचारधारा: शिंदे ने वरिष्ठ नेता रामदास कदम के बयानों का समर्थन करते हुए चुनौती दी, “जो लोग हमें कुचलने की धमकी दे रहे हैं, क्या हमारे जोशीले शिवसैनिक उनके पैर सलामत छोड़ेंगे? हमारे कार्यकर्ता बालासाहेब ठाकरे और आनंद दिघे की कट्टर विचारधारा को मानने वाले सच्चे शिवसैनिक हैं।”
विरासत खून से नहीं, विचारों से तय होती है
उद्धव ठाकरे द्वारा पार्टी अध्यक्ष पद से हटने के संकेतों के बीच शिंदे ने स्पष्ट किया कि शिवसेना कोई जमीन का टुकड़ा नहीं है जिसे वसीयत में दे दिया जाए। यह लाखों कार्यकर्ताओं के स्वाभिमान और विचारों की पार्टी है। उत्तराधिकार खून के रिश्तों से नहीं, बल्कि बालासाहेब के विचारों पर चलने से तय होता है। आज असली शिवसेना ही महाराष्ट्र के विकास को गति दे रही है।



