यूपी में ₹100 करोड़ का दवा-उपकरण सप्लाई घोटाला: 7 साल के रिकॉर्ड की ED कर रही जांच, पूर्व विधायक मुख्य आरोपी

उत्तर प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में दवाइयों और चिकित्सा उपकरणों की आपूर्ति में करीब ₹100 करोड़ के बड़े घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शिकंजा कसते हुए उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाइज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPMSCL) से पिछले 7 वर्षों के खरीद और सप्लाई के रिकॉर्ड तलब किए हैं।
जांच एजेंसी ED के सहायक निदेशक (लखनऊ जोन) एल.के. वर्मा ने स्वास्थ्य विभाग के महानिदेशक डॉ. पवन कुमार अरुण को ‘अति आवश्यक’ श्रेणी का पत्र भेजकर 2019-20 से लेकर 2025-26 तक की जानकारी मांगी है। हालांकि, UPMSCL ने सीधे दस्तावेज देने के बजाय प्रमुख सचिव (स्वास्थ्य) से अनुमति मांगी है। एजेंसी का आरोप है कि रिकॉर्ड सौंपने में जानबूझकर देरी की जा रही है ताकि सबूतों के साथ छेड़छाड़ की जा सके।
पूर्व विधायक मुकेश श्रीवास्तव पर शिकंजा घोटाले की जांच का मुख्य केंद्र पूर्व विधायक मुकेश श्रीवास्तव और उनसे जुड़ी बेनामी कंपनियां हैं।
- फर्जी और बेनामी फर्म का जाल: आरोप है कि पूर्व विधायक ने अपने परिजनों, रिश्तेदारों और करीबियों के नाम पर ‘आरपी ग्रुप ऑफ कंस्ट्रक्शन’ जैसी फर्जी निर्माण और सप्लाई कंपनियां बनाईं।
- बिना टेंडर दिए ठेके: बिना वैध प्रक्रिया के फर्जी कागजातों के आधार पर करोड़ों रुपये की सप्लाई और मेंटेनेंस के ठेके हासिल किए गए।
- फर्जी बिलिंग: सपोर्टिंग सुपरविजन योजना के तहत 1 गाड़ी के संचालन पर 3 गाड़ियों का भुगतान उठाया गया।
- विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत: बलरामपुर के पूर्व सीएमओ डॉ. घनश्याम सिंह सहित कई सेवानिवृत्त स्वास्थ्य अधिकारियों पर नियमों को ताक पर रखकर पूर्व विधायक की फर्मों को अनुचित लाभ पहुंचाने का आरोप है।
इस सिलसिले में श्रावस्ती, बलरामपुर, गोंडा और बहराइच जिलों में एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। विजिलेंस टीम पूर्व में मुकेश श्रीवास्तव को आय से अधिक संपत्ति और अनियमितताओं के मामले में गिरफ्तार भी कर चुकी है।
ED ने इन 5 बिंदुओं पर मांगा साल-दर-साल ब्योरा एजेंसी ने UPMSCL और स्वास्थ्य विभाग से 5 प्रमुख बिंदुओं पर बिंदुवार जानकारी मांगी है:
- टेंडर का विवरण: UPMSCL द्वारा किन-किन कंपनियों को दवा और चिकित्सा उपकरण खरीद के टेंडर दिए गए?
- सप्लाई और लागत: कंपनियों द्वारा कितनी मात्रा में दवाएं/उपकरण दिए गए और उनकी कुल धनराशि कितनी थी?
- कुल भुगतान: संबंधित कंपनियों को अब तक कितना कुल पेमेंट किया गया?
- घटिया सामग्री पर कार्रवाई: सब-स्टैंडर्ड या घटिया दवा-उपकरणों की आपूर्ति का ब्योरा और ऐसी कंपनियों पर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट।
- बैंक गारंटी: टेंडर और सप्लाई के एवज में जमा कराई गई बैंक गारंटी की पूरी डिटेल।
इसके अलावा, गोंडा, बहराइच, श्रावस्ती और बलरामपुर के अस्पतालों में 2013-14 से अब तक जारी हुए फंड, उसके उपयोग और मेडिकल रिइम्बर्समेंट (चिकित्सा प्रतिपूर्ति) का पूरा हिसाब भी मांगा गया है।
क्यों बना था UPMSCL? वर्ष 2018 से पहले उत्तर प्रदेश में दवाइयों और उपकरणों की खरीद जिला स्तर पर सीएमओ के माध्यम से होती थी, जिसमें आए दिन भ्रष्टाचार की शिकायतें आती थीं। इस पर लगाम लगाने के लिए राज्य सरकार ने 2018 में UPMSCL का गठन किया था। नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) के तहत केंद्र से मिलने वाले बजट से UPMSCL केंद्रीय स्तर पर टेंडर जारी कर दवाएं खरीदता है और जिलों में सप्लाई करता है। लेकिन अब UPMSCL की खरीद प्रक्रिया भी ED की जांच के रडार पर आ गई है।




