बॉर्डर खोल दो, हमें बचा लो’: बांग्लादेशी हिंदुओं की भारत से भावुक अपील

‘बॉर्डर खोल दो, हमें बचा लो…‘; बांग्लादेश में हिंसा के बीच हिंदुओं की भारत से भावुक गुहार
ढाका/नई दिल्ली: बांग्लादेश में जारी राजनीतिक अस्थिरता और कानून-व्यवस्था की चरमराती स्थिति के बीच वहां रह रहे अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय में भारी भय व्याप्त है। पिछले कुछ दिनों में हुई लक्षित हिंसा, विशेषकर दीपू चंद्र दास और अमृत मंडल की नृशंस हत्याओं ने इस डर को और गहरा कर दिया है। अब पीड़ित परिवार और डरे हुए नागरिक भारत सरकार से अपनी सीमाएं खोलने की गुहार लगा रहे हैं ताकि वे अपनी जान बचाने के लिए शरण ले सकें।
हिंसा और डर का माहौल
बांग्लादेश के विभिन्न हिस्सों से ऐसी खबरें आ रही हैं जहाँ उपद्रवियों द्वारा हिंदू घरों, व्यवसायों और मंदिरों को निशाना बनाया जा रहा है। दीपू चंद्र दास और अमृत मंडल की हत्याओं ने समुदाय को झकझोर कर रख दिया है। सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कई हिंदू परिवारों ने जंगलों या खेतों में छिपकर रातें बिताई हैं।
सीमा पर बढ़ती भीड़
भारत-बांग्लादेश सीमा (विशेषकर पश्चिम बंगाल और मेघालय से सटे इलाकों) पर सैकड़ों की संख्या में हिंदू नागरिक एकत्र हो रहे हैं। उनकी केवल एक ही मांग है: “हमें भारत में प्रवेश करने दें।” पीड़ितों का कहना है कि वे अपनी संपत्ति और घर छोड़ने को तैयार हैं, बस उन्हें अपनी और अपने बच्चों की जान की सुरक्षा चाहिए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनके पास अब कोई विकल्प नहीं बचा है और वे सीमा पार करने की अनुमति मिलने का इंतजार कर रहे हैं।
मुख्य बिंदु: वर्तमान स्थिति
* लक्षित हमले: दीपू चंद्र दास और अमृत मंडल जैसे स्थानीय हिंदू नेताओं और नागरिकों की हत्या के बाद समुदाय में असुरक्षा की भावना चरम पर है।
* लूटपाट और आगजनी: कई जिलों में हिंदू अल्पसंख्यकों की संपत्तियों को नुकसान पहुँचाया गया है।
* भारत की प्रतिक्रिया: भारत सरकार ने सीमा पर सतर्कता बढ़ा दी है और स्थिति पर करीब से नजर रख रही है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने बांग्लादेशी अधिकारियों से अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह किया है।
> “हमारे पास अब कुछ नहीं बचा है। हमारे घरों को जला दिया गया और हमारे अपनों को मार दिया गया। हम सिर्फ जिंदा रहना चाहते हैं। भारत माता हमें अपनी शरण में ले ले।” > — सीमा पर फंसे एक पीड़ित का दर्द भरा बयान>
आगे की राह
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और स्थानीय नागरिक समूहों ने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार से अल्पसंख्यकों को सुरक्षा प्रदान करने की अपील की है। वहीं, भारत में भी विभिन्न संगठन केंद्र सरकार से इन शरणार्थियों के लिए मानवीय आधार पर सुरक्षित गलियारा (Safe Passage) बनाने की मांग कर रहे हैं।




